नई दिल्ली, 16 मार्च 2025* – भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), जिसे देश का “स्टील फ्रेम” कहा जाता है, लंबे समय से अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जानी जाती रही है। लेकिन हाल के वर्षों में कई IAS अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, जिन्होंने इस प्रतिष्ठित सेवा की छवि को धूमिल किया है। वेबसाइट The420.in ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में “भारत के सबसे भ्रष्ट IAS अधिकारियों” की सूची जारी की है, जिसमें सत्ता के शीर्ष से लेकर जेल की सलाखों तक का सफर तय करने वाले अधिकारियों के नाम शामिल हैं। यह रिपोर्ट भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, जमीन घोटालों और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों पर आधारित है।
भ्रष्टाचार के बड़े चेहरे
रिपोर्ट के अनुसार, कई IAS अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर अकूत संपत्ति अर्जित की और सरकारी तंत्र को नुकसान पहुंचाया। इनमें से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
1. के. राजेश (2011 बैच, गुजरात कैडर)
के. राजेश को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिश्वतखोरी के एक मामले में गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने सुरेंद्रनगर जिले के कलेक्टर के रूप में बंदूक लाइसेंस जारी करने के लिए रिश्वत ली और संदिग्ध जमीन सौदों में शामिल थे। छापेमारी के दौरान उनके पास से भारी मात्रा में सबूत मिले, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई।
2. नीरा यादव (1971 बैच, उत्तर प्रदेश कैडर)
नीरा यादव का नाम उत्तर प्रदेश और एनसीआर में कई जमीन घोटालों से जुड़ा है। उन्होंने पॉश इलाकों में राजनेताओं और व्यापारियों को बड़े पैमाने पर जमीन आवंटित की, जिसके बदले में मोटी रकम वसूली। 2012 में CBI कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दो साल की सजा को बरकरार रखा।
3. बाबूलाल अग्रवाल (1998 बैच, छत्तीसगढ़ कैडर)
बाबूलाल अग्रवाल, जो राज्य के कृषि सचिव थे, के पास आयकर छापों में 500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति मिली। इसमें 446 बेनामी बैंक खातों में 40 करोड़ रुपये और 16 शेल कंपनियां शामिल थीं, जिनका उपयोग हवाला लेनदेन के लिए किया गया। उनकी संपत्तियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जब्त कर लिया।
भ्रष्टाचार का पैटर्न
इन मामलों से पता चलता है कि भ्रष्टाचार का दायरा केवल रिश्वत तक सीमित नहीं है। कई अधिकारियों ने शेल कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद करने, सरकारी जमीन को गैरकानूनी तरीके से हड़पने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति जमा करने जैसे तरीके अपनाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ अधिकारी राजनीतिक संरक्षण के कारण लंबे समय तक जांच से बचे रहे, लेकिन अंततः कानून के शिकंजे में आ गए।
सिस्टम पर सवाल
IAS अधिकारियों को देश की रीढ़ माना जाता है, लेकिन इन भ्रष्टाचार के मामलों ने सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता की कमी, जवाबदेही का अभाव और अधिकारियों को मिलने वाली असीमित शक्तियां भ्रष्टाचार के प्रमुख कारण हैं। पूर्व RBI गवर्नर डी. सुब्बाराव ने अपनी किताब में कहा था कि केवल 25% IAS अधिकारी प्रभावी ढंग से काम करते हैं, जबकि 25% या तो भ्रष्ट या अक्षम हैं।
कानूनी कार्रवाई और सजा
रिपोर्ट में उल्लेखित अधिकांश अधिकारियों के खिलाफ CBI और ED जैसी एजेंसियों ने कड़ी कार्रवाई की है। कुछ को जेल की सजा सुनाई गई, जबकि कुछ अभी भी जांच के दायरे में हैं। उदाहरण के लिए, नीरा यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाई, वहीं बाबूलाल अग्रवाल की संपत्ति जब्त की गई। हालांकि, कई मामलों में राजनीतिक दबाव के कारण जांच धीमी हो जाती है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस रिपोर्ट को लेकर लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। एक यूजर ने लिखा, “ये लोग जनता के टैक्स के पैसे पर पलते हैं और फिर उसी को लूटते हैं।” वहीं, कुछ ने सिस्टम में सुधार की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे मामले कम हो सकें।
आगे की राह
The420.in की यह रिपोर्ट न केवल भ्रष्टाचार के काले चेहरों को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि क्या भारत का प्रशासनिक ढांचा वास्तव में “स्टील फ्रेम” है या यह जंग खा चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कड़े कानून, पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया और नियमित ऑडिट जैसे कदम उठाने होंगे।
इस बीच, यह सूची एक चेतावनी के रूप में सामने आई है कि सत्ता का दुरुपयोग करने वालों को अंततः कानून का सामना करना पड़ता है। सवाल यह है कि क्या यह सजा भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए काफी है, या फिर यह केवल सतह को छू रही है?