विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप्रैल 2025 के अवसर पर माननीया द्रोपदी मुर्मू के नाम 8 सूत्रीय ज्ञापन पत्र कलेक्टर सीधी के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन सौपने के वाद टोंको – रोंको -ठोंको क्रन्तिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी नें बताया की जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 125 से अधिक जिलों से सभी के लिए स्वास्थ्य अधिकारों की संयुक्त आवाज उठायी है। इस अवसर पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुरमू और 18 राज्यों (छत्तीसगढ़, ओड़ीशा, मध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, बिहार, मणिपुर, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु), और दो केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, और लद्दाख के मुख्य मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को जिलों में कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से जिला और विकास खंड स्तर पर ज्ञापन दिया गया। विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य की चुनौतियों पर चर्चा के लिए एक बैठक (ऑनलाइन और ऑफलाइन) भी आयोजित की गई। विभिन्न राज्यों में सभी के लिए स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए अगले एक साल के अभियान की योजना बनाई गई है।
अल्मा-आटा घोषणापत्र में वर्ष 2000 तक ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ का वादा किया गया था, हालांकि 25 साल बाद भी यह पूरा नहीं हो पाया है। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने पूरे देश में विभिन्न सामाजिक संगठनों, संस्थाओं, और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से चर्चा, संवाद और कई दौर की बैठक कर स्वास्थ्य संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और वर्तमान स्वास्थ्य की समस्याओं, सरकार की जन विरोधी नीतियों और चुनौतियों पर विमर्श किया साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हेतु सुझाव को एकत्रित किया गया।
देश के पांच राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और झारखंड में सरकार जिला अस्पताल को निजी संस्थाओं को सौंपने की पहल कर रही है जो निजी मेडिकल कॉलेज खोल रही हैं, इसका भी मेडिकल डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता समूह, सामाजिक संगठन और नागरिक विरोध कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को जन केन्द्रित और मजबूत बनाने तथा सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली को बचाने के लिए जन स्वास्थ्य अभियान भारत ने स्वास्थ्य के अधिकार कानून बनाने की मांग उठाई है।
जन स्वास्थ्य अभियान, इंडिया राष्ट्रीय संयोजक समूह, विशेषज्ञों का सलाहकार समूह और राज्य एवं जिला समूह के सदस्यों ने कहा कि, स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को तुरंत रोक जाना चाहिए, इसका विरोध स्थानीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक हो रहा है। सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और विस्तारित करना चाहिए, स्वास्थ्य बजट को सकल घरेलू उत्पाद के 2.5% तक बढ़ाना चाहिए और न केवल स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ प्रदान करके अपने नागरिकों के स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वास्थ्य के प्रमुख निर्धारक जैसे खाद्य सुरक्षा, सुरक्षित पेयजल, रोजगार, सुरक्षित वातावरण, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिला सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल आदि को प्राथमिकता दी जाए और उन पर ध्यान दिया जाए। सभी भारतीयों के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षित कार्य वातावरण की मांग करते हुए जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया स्थानीय समर्थन के साथ देश भर में निम्नलिखित मांग करता है।
1. स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण को बंद करे
2. सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर सभी दवाइयाँ निःशुल्क होनी चाहिए तथा जीवन रक्षक एवं आवश्यक दवाओं पर कोई कर नहीं होना चाहिए।
3. स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाकर लागू करना जो सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य क्षेत्र दोनों पर बंधनकारी हो तथा सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम 2.5% तक बजट बढ़ाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना।
4. विकेन्द्रीकृत स्वास्थ्य देखभाल शासन प्रणाली सुनिश्चित करे और सामुदायिक स्तर की सेवाओं सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ और विस्तारित करना, आशा, एएनएम, नर्स आदि की संख्या और कार्य स्थितियों में सुधार करना।
5. सभी राज्यों में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट अधिनियम को लागू करें और निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में दर नियंत्रण और मानक उपचार दिशा-निर्देशों (Standard Treatment Guidelines) को लागू करें।
6. स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले सामाजिक कारकों के रूप में खाद्य सुरक्षा, सुरक्षित पेयजल, रोजगार, सुरक्षित वातावरण, महिला सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल वातावरण आदि सुनिश्चित करना।
7. श्रमिकों के लिए सभी क्षेत्रों में व्यावसायिक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करें तथा इस संबंध में सार्वभौमिक नीति, अधिनियमों और नियमों को लागू करें।
8. सभी नीतियों में स्वास्थ्य को शामिल करें और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में डिजिटल रिकॉर्ड की कमी सहित सभी प्रकार के भेदभाव नहीं होना चाहिए ।