मुंबई, 11 मार्च 2025 – महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए एक अभिनव योजना, “ड्रोन दीदी,” शुरू करने की घोषणा की है। यह योजना केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय के सहयोग से लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण देकर उन्हें आधुनिक कृषि और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
योजना का विवरण
“ड्रोन दीदी” योजना के तहत, राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में 15,000 महिलाओं को ड्रोन संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है। यह प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाएगा और इसके लिए राज्य भर में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, महिलाओं को ड्रोन पायलट का प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जिससे वे न केवल कृषि क्षेत्र में बल्कि आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण, और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी काम कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा, “महिलाएं हमारे समाज की रीढ़ हैं। यह योजना न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि तकनीक के क्षेत्र में उनकी भागीदारी को भी बढ़ाएगी। ड्रोन दीदी योजना के माध्यम से हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को नए अवसर प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहे हैं।”
कृषि में ड्रोन का महत्व
इस योजना का एक प्रमुख पहलू यह है कि यह ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ेगी। ड्रोन का उपयोग खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव, बीज बोने, मिट्टी की गुणवत्ता की जांच और फसल की निगरानी जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है। इससे न केवल समय और श्रम की बचत होगी, बल्कि उत्पादकता में भी वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक के प्रयोग से छोटे और मध्यम किसानों को भी बड़े पैमाने पर लाभ मिलेगा।
महिलाओं के लिए अवसर
प्रशिक्षण के बाद, महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से ड्रोन खरीदने के लिए सब्सिडी और ऋण सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, सरकार ने ड्रोन सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ साझेदारी की योजना बनाई है, ताकि प्रशिक्षित महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। कुछ महिलाएं अपने स्वयं के ड्रोन सेवा व्यवसाय शुरू करने में भी सक्षम होंगी, जिससे वे उद्यमी बन सकेंगी।
प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया
इस योजना के लिए चयन प्रक्रिया में ग्रामीण क्षेत्रों की 18 से 35 वर्ष की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं कक्षा निर्धारित की गई है, हालांकि तकनीकी रुचि और सीखने की इच्छा को भी महत्व दिया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ड्रोन के संचालन, मरम्मत, और सुरक्षा नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह कोर्स 3 से 6 महीने का होगा, जिसमें प्रायोगिक और सैद्धांतिक दोनों तरह की शिक्षा शामिल होगी।
सरकार की प्रतिबद्धता
राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि हर गांव में कम से कम एक ‘ड्रोन दीदी’ हो, जो न केवल अपनी आजीविका कमाए बल्कि अपने समुदाय की सेवा भी करे। यह योजना महाराष्ट्र को तकनीकी रूप से अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” सरकार ने इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट आवंटित किया है, जिसमें केंद्र सरकार का भी योगदान शामिल है।
जनता की प्रतिक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने इस योजना का स्वागत किया है। नाशिक की एक महिला किसान, रेखा पाटिल, ने कहा, “हमें हमेशा खेती में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना पड़ता है, लेकिन अब ड्रोन जैसी तकनीक सीखने का मौका मिलेगा तो हमारा काम आसान हो जाएगा और हम आत्मनिर्भर बन सकेंगे।” वहीं, कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि योजना को सफल बनाने के लिए जागरूकता अभियान और बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान देना होगा।
भविष्य की संभावनाएं
“ड्रोन दीदी” योजना को महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक लागू करने के बाद इसे अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यह योजना न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण भारत को डिजिटल और तकनीकी क्रांति से जोड़ने में भी मदद करेगी।
महासंवाद के इस प्रयास से यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र सरकार महिलाओं को समाज के हर क्षेत्र में आगे लाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह योजना निश्चित रूप से एक नई शुरुआत है, जो ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का वादा करती है।