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महाकुंभ 2025: पीएम मोदी ने की एकता की प्रशंसा, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की यात्रा की घोषणा

प्रयागराज, 27 फरवरी 2025
हिंदुओं के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में से एक, महाकुंभ मेला 2025 का समापन 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के साथ हुआ। इस 45 दिनों तक चले धार्मिक आयोजन में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई, जिसे एकता और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस भव्य आयोजन के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “एकता का महायज्ञ” करार देते हुए देशवासियों की प्रशंसा की और घोषणा की कि वह गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में दर्शन के लिए जाएंगे।
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, “महाकुंभ संपन्न हुआ…एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में पूरे 45 दिनों तक जिस प्रकार 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ, एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ी, वो अभिभूत करता है!” उन्होंने आगे कहा कि वह इस आयोजन की सफलता से प्रभावित होकर 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम, सोमनाथ मंदिर में प्रार्थना करेंगे और देशवासियों के लिए एकता की अविरल धारा की कामना करेंगे।
महाकुंभ की भव्यता
13 जनवरी से शुरू हुए इस मेले में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान किया। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, इस बार मेले में 66 करोड़ से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम बनाता है। आयोजन की व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की वैश्विक स्तर पर सराहना हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सांस्कृतिक और लॉजिस्टिक चमत्कार था, जिसमें सफाई कर्मियों से लेकर पुलिस और नाविकों तक ने अथक मेहनत की।
सोमनाथ यात्रा का महत्व
पीएम मोदी की सोमनाथ यात्रा की घोषणा को एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। सोमनाथ मंदिर, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला है, हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिनकी पूजा महाशिवरात्रि पर महाकुंभ के अंतिम दिन बड़े उत्साह के साथ की गई थी। मोदी ने कहा, “मैं श्रद्धा रूपी संकल्प पुष्प को समर्पित करते हुए हर भारतीय के लिए प्रार्थना करूंगा।”

निष्कर्ष
महाकुंभ 2025 का समापन न केवल एक धार्मिक उत्सव था, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता और संगठन क्षमता का भी प्रदर्शन था। पीएम मोदी की सोमनाथ यात्रा इस एकता को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। यह आयोजन आने वाले वर्षों तक लोगों के दिलों में बसा रहेगा।

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