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किसानों ने लिया फैसला सरसों 6000 रुपए से कम दामों पर नहीं बेचान करेंगे सरसों – रामपाल जाट राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान महापंचायत राजस्थान

अलवर/ जयपुर

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में अलवर , खैरथल -तिजारा , कोटपूतली -बहरोड़ जिले के किसानों के साथ संवाद करके सरसों के 6000 रूपये क्विंटल से बोलीं आरम्भ करने के लिए 1 मार्च से 15 मार्च तक सरसों को लेकर मंडियों में किसान नहीं पहुंचेंगे।
सरसों उत्पादन में राजस्थान में तीनों जिले मिलाकर प्रथम होने के साथ प्रतिशतता में भी प्रथम श्रेणी रखतें हैं ।

सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रूपये क्विंटल हैं । खरीद का तेल अंश 35% का तय होता है। इसी लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिना तेल की अंश मापें ही सरसों खरीद की जाती है। व्यापारियों द्वारा 42% तेल अंश के आधार पर बनाकर सरसों खरीद की जाती हैं। जिससे कारण किसानों को 0.25 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ ही 15 रुपये किसान को दय होना आवश्यक हैं।

सरकार एवं व्यापारियों का गठजोड़ द्वारा 42% अंश के आधार पर निलामी बोलीं मानकर लगाईं जाती हैं। जैसे ही 42% तेल अंश नहीं बैठता तों व्यापारियों द्वारा मनमाफ़िक पैसा काट कर दाम लगाया जाता है।
कहीं जगह 1% प्रतिशत तेल अंश पर 150 रुपये तक काट लिया जाता है।

मंडियों में भी नियम विरुद्ध जाकर व्यापारियों द्वारा 400-600 ग्राम वज़न प्रति क्विंटल अधिक लिया जा रहा है। जिससे किसानों के घरों में पहूचाने वाले करोड़ों रुपए व्यापारियों के घरों में पहूंच रहें हैं।
इसी पैसा से व्यापारी मंडी अधिकारियों को खुश करने के काम भी आता है। सरकार को 1 मार्च से
एम एस पी पर खरीद आरम्भ कर देनी चाहिए 25% सरसों खरीद का प्रावधान प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत् खरीद होती है।
राजस्थान सरकार एक किसान से 40 क्विंटल खरीद की व्यवस्था करें। 40 क्विंटल के लिए प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री से करावें क्योंकि डबल इंजन की सरकार बनी हुई है। पहले एक महिनें तक सरसों एक किसान से 25 क्विंटल खरीद होती है। किसान आन्दोलन के कारण 40 क्विंटल कर दिया जाता है। जिससे किसानों में भी पक्षपातपूर्ण व्यवहार नज़र आता है।

रामपाल जाट ने विदेशों आयातित पाम ऑयल पर 85% तक आयातित शुल्क लगाया हुआ था बिच में इसी शुल्क को शून्य प्रतिशत कर दिया। किसानों ने जब जंतर- मंतर पर सरसों सत्याग्रह करके 300% तक शुल्क लगानें की मांग की थी। तब जाकर केन्द्र सरकार द्वारा आयातित पाम ऑयल पर 20% शुल्क लगाया गया।

वर्ष 2008 से पाम ऑयल तेल को मिलावट आरम्भ की गई जिसे कोराना काल के समय 2021 की सरसों में पाम ऑयल मिलावट पर पाबन्दी लगाई गई। उसके उपरांत भी सरसों में पाम ऑयल मिलावट हो रहीं हैं। 6 माह पुराना पाम तेल खाने से हार्ट अटैक आने अवश्य आने की सम्भावना है।

खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरों पर आजीवन कारावास का प्रावधान होने के बाद भी सरकार द्वारा मिलावट के लिए आदेश करना भी कही न कही किसानों की कमर तौडनें के सामान हैं। 2021 में पाम पर पाबन्दी लगाने के बावजूद भी मिलावटखोरों पर कार्यवाही करने वाली टीम भी सुस्त पड़ी हैं। यदि मिलावटखोरों पर ताबड़तोड़ कार्यवाही की जायें तों स्वत: ही सरसों के दामों में वृद्धि होंगी।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किशन डागर, प्रदेशाध्यक्ष मुसुद्दीलाल यादव , प्रो गोपाल मोदानी संयोजक जयपुर, प्रदेश प्रवक्ता सुरेश बिजारणियां,युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी,दादा पूरण चौधरी, विरेन्द्र क्रान्तिकारी जिला अध्यक्ष खेरथल -तिजारा, रोहिताश बोहरा वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सुरजीत चौधरी,रामभरोसी यादव मुंडावर अध्यक्ष,माडूराम खटाना तहसील उपाध्यक्ष शेर सिंह थानेदार अध्यक्ष हरसौली आदि।

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