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प्याज की खेती की संपूर्ण जानकारी, संभावनाएं एवं प्रयोग और परिणाम ।* 

आकाश चौरसिया 

जैविक कृषि सागर मध्यप्रदेश

प्याज भारत में लगभग हर घर की रसोई का हिस्सा है , इसमे अनेक ओसधीये गुण भी होते हैं यह भारत में महाराष्ट्र,कर्नाटका, गुजरात और मध्यप्रदेश में ज्यादा उगाई जाती है । 

*प्याज की खेती के लिए खेत का चयन वा तैयारी* 

– प्याज की खेती के लिए दो मॅट मिट्टी सबसे अच्छी होती है , फसल लगाने के पूर्व मिट्टी को तैयार करना महत्वपूर्ण होता है ।

सर्व प्रथम मिट्टी का पी. एच. मान चेक करना चाइए समान्य पी. एच. 6.5 से 7.5 की स्थति में 

जमीन जनित फफुद या अन्य बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए मिटटी में 100 किलो चूना पॉउडर ओर 50 किलो नीम का पॉउडर या 200 किलो ताजी नीम की पत्तियां डलवा कर जुताई कर 15 दिन के आस पास छोड़ कर धूप लग देनी चाहिए । तद पश्चात चेक करे कि मिट्टी में कोई अवशिष्ट नहीं होना चहिए अगर है तो इसके लिए बेस्ट डी कंपोजर का प्रयोग कर खेत में नमी रख मिला दे ताकि ये कार्बनिक पदार्थ में बदल जाए और फसल को नुकसान पहुंचाने के बजाएं फायदा पहुंचाए । बेस्ट डी कंपोजर का प्रयोग करने के बाद कम से कम 10 छोड़ का फसल लगाना चाहिए। 

 *लगाने का समय* 

– सामान्यतः इसको नर्सरी लगाकर लगाया जाता है और सितंबर 15 के बाद नर्सरी डालने का सही समय होता है और बारिश के समय सीधा छिड़काव विधि से लगा सकते हैं । लगभग 45 दिन के पश्चात नर्सरी को खेत में लगाते हैं । 

परन्तु गूटी (छोटी प्याज)से इसे लगभग साल भर लगाया जा सकता है और इसके साथ तीन तरीके मुनाफा बनाया जा सकता पहला गूटी लगाकर 25 से 35 दिन के अंदर हरी प्याज के रूप में औसतन 20 से 40 रू किलो में साल भर बेचा जा सकता है, जो की बहुत कम समय में बहुत ज्यादा मुनाफा का रास्ता है ।

दूसरा 25 से 35 दिन में तैयार हरी प्याज को सोलर डिहाइड्रेटर में ड्राई करके हरी प्याज चिप्स के रुप में या हरी प्याज पॉउडर के रूप में बेचा जा सकता है जिसका उपयोग सूप में, सब्जी में, चटनी में और चाइनीज फूड होता है और बजार में अच्छे दाम मिलते है । 

तीसरा इसे खेत में 3 माह रहने दिया जाए तो यह बड़ी प्याज में तब्दील हो जाती है और इस विधि से नर्सरी लगाने का समय 45 दिन और ट्रांसप्लांट के बाद 4 माह में से 2 माह 15 दिन पहले प्याज का फुल कांदा बजार में अच्छे दाम में बेचा जा सकता है । 

 *संतुलित खाद*

– संतुलित भोजन हर फसल की अच्छी उपज का आधार बनता है , और इसके लिए जरूरी होता है की मिट्टी को सभी पोषक तत्व दिए जाए ।

प्राकृतिक आदानो से बने जैविक खादों मे क्रमशः1 समान्य कम्पोस्ट 10 टन प्रति एकड़ , 2. दो टन प्रति एकड़ वर्मीफॉस , 3. जैविक पोटाश 500 किलो ग्राम प्रति एकड़ , 4. तरल जैविक नाइट्रोजन 500 लीटर पर एकड़ फसल के एक माह बाद हर बार पानी देने पर 

5. मटका खाद 50 किलो सभी आवश्यक सामग्री के साथ प्रति एकड़ फसल लगने के एक माह बाद पानी के साथ हर 10 से 15 दिन के अंतराल पर ।

ये सभी खादों की दी गई मात्रा के अनुसार डालकर मिट्टी में ठीक तरीके से मिला दे ।

 **लगाने का तरीका* 

– इसे मेडा विधि से लगाना अच्छा होता है । जिसमें उपज अच्छी आती है और 4 वाई 10 फीट की छोटी छोटी क्यारी बना कर भी 4 से 5 इंच की दूरी पर लगाया जाता है ।

 *बीमारियां वा इसके रोकथाम*  

प्याज में सामान्यता बैक्टिरियल ब्लाइट , फफूद और थ्रिप्स का प्रभाव होता है , जिसे मिट्टी की तैयारी और संतुलित वा संपूर्ण जैविक खादों की पूर्ति से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है ।

परन्तु ज्यादा प्रकोप न हो उसके लिए समय समय पर उपचार आवश्यक है बैक्टिरियल ब्लाइट के लिए हम 100 ग्राम चूना और 15 लीटर पानी का स्प्रे कर नियंत्रित कर सकते है । फफूद के लिए भारतीय गाय की छाछ 60 दिन पुरानी 2 लीटर और 13 लीटर पानी मिलाकर स्प्रे करने से नियंत्रित होता है और थ्रीप्स के लिए 2 माह पुरानी भारतीय गाय की 2 लीटर छाछ और 150 ग्राम लाल मिर्च का पॉवडर 13 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करने से थ्रिप्स को नियंत्रित किया जा सकता है । 

 *उपज* 

– क्यारी विधि से उपच 150 कुंतल प्रति एकड़ तक ली जा सकती है और मेड़ा विधि से 200 कुंतल तक प्रति एकड़ ली जा सकती है । बाजार में समान्य दाम होने पर इस खेती से 1 से 1.5 लाख रु प्रति एकड़ का मुनाफा किया जा सकता है । एवम् यही हरी प्याज से 3 से 4 गुना ज्यादा हो सकता है ।

  इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए 9179066275 पर व्हाटसएप कर अपने सवालों के उत्तर ले ।

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