मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के राज में जंगलराज चरम पर पहुंच गया है। निर्दोष नागरिकों की हत्याएं, पुलिस पर हमले और अपराधियों का खुला मनोबल अब आम बात हो गई है। कैमोर (कटनी) में दिनदहाड़े भाजपा नेता नीलेश रजक की गोली मारकर हत्या, गुना के गणेशपुरा में बीजेपी नेता महेंद्र नागर द्वारा किसान रामस्वरूप धाकड़ की निर्मम हत्या, जबलपुर में पति-पत्नी का डबल मर्डर, सिंगरौली में मोबाइल चोरी के नाम पर सार्वजनिक सजा और पन्ना में गैर-इरादतन हत्या के आरोपी पंचम यादव द्वारा पुलिस दल पर कुल्हाड़ियों से हमला—ये घटनाएं सत्ता की नाकामी का जीता-जागता प्रमाण हैं। क्या अब भाजपा के अपने नेता भी ‘जुल्म के जंगलराज’ का शिकार हो रहे हैं?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गृह मंत्री के रूप में विफल साबित हो चुके हैं। गुना से पूरे देश गूंज रही पीड़ितों की आवाज को अनदेखा कर सत्ता अपराधियों के साथ खड़ी हो गई है। पन्ना में पुलिसकर्मियों को कुल्हाड़ियों से ललकारकर भागना पड़ना और थानेदार-कॉन्स्टेबल को बंधक बनाना दर्शाता है कि कानून-व्यवस्था की लगाम पूरी तरह ढीली पड़ चुकी है। निर्दोष किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों में भय का माहौल व्याप्त है। सत्ता की आनंद-मग्न नींद कब टूटेगी?
मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा,
“भाजपा सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है। वैधानिक साक्ष्य स्पष्ट बता रहे हैं कि सत्ता का हाथ अपराधियों के कंधे पर है। हम मांग करते हैं कि इन सभी घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषी नेताओं पर कार्रवाई की जाए और गृह मंत्री इस्तीफा दें। जनता अब इस असफल व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और आंदोलन की तैयारी में है।”
कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश की जनता से अपील करती है कि इस जंगलराज के खिलाफ एकजुट हों। सत्ता को जागना ही होगा, वरना लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़ा आंदोलन किया जाएगा।




