नई दिल्ली, अगस्त, 2025: कोका-कोला अपने बॉटलिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर देश में 5,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर रही है। यह कदम ‘ग्रीन लॉजिस्टिक्स’ यानी पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। इस पहल से पूरे भारत में कोका-कोला के प्रॉडक्ट्स आसानी से पहुंचेंगे, साथ ही रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह निवेश भारत में कोका-कोला की तरक्की और समाज के प्रति उसकी ज़िम्मेदारी को भी दिखाता है।
कोका-कोला के उत्पाद रोज़ाना शहरी और ग्रामीण इलाकों में, हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। इस काम को संभव बनाने के लिए हज़ारों ट्रक ड्राइवर दिन-रात मेहनत करते हैं। ये ड्राइवर सुनिश्चित करते हैं कि लोगों तक कोका-कोला के पेय समय पर पहुँचें। जैसे-जैसे कंपनी अपने ट्रकों का नेटवर्क बढ़ा रही है, वैसे-वैसे और भी लोगों को नौकरी मिल रही है। इस तरह, कोका-कोला भारत में लोगों को रोजगार देने और सप्लाई चेन को मज़बूत बनाने में एक अहम भूमिका निभा रहा है।
कोका-कोला का एक प्रमुख बॉटलर, सुपीरियर ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड, ने इस वर्ष लगभग 200 अत्याधुनिक ट्रकों और ईवी को शामिल करके अपनी वितरण क्षमता और गुणवत्ता को काफी बढ़ाया है। इस बीच, सिस्टम का एक अन्य प्रमुख बॉटलिंग पार्टनर, एसएलएमजी बेवरेजेज, ने पिछले तीन वर्षों में 3,000 से अधिक ईवी को अपने इलेक्ट्रिक वाहनों के पोर्टफोलियो में जोड़ा है ताकि लास्ट माइल डिलीवरी को समर्थन मिले। हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस (एचसीसीबी) ने भी 10 राज्यों में लगभग 500 इलेक्ट्रिक वाहन तैनात करके नेटवर्क को मजबूत किया है, जिससे क्षेत्रीय कवरेज और परिचालन दक्षता में सुधार हुआ है। सामूहिक रूप से, बॉटलिंग पार्टनर्स के गाडि़यों की संख्या आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है।
कोका-कोला कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के अलावा, अपने ड्राइवरों की सेहत पर भी ध्यान देता है। ड्राइवरों को भारत की अलग-अलग सड़कों के हिसाब से हर साल सड़क सुरक्षा की ट्रेनिंग दी जाती है। उनकी नियमित स्वास्थ्य और आँखों की जाँच कराई जाती है, और तनाव को दूर करने के लिए वेलनेस सेमिनार भी आयोजित किये जाते हैं। प्रत्येक वाहन की नियमित रूप से परिचालन मानकों को पूरा करने के लिए जाँच की जाती है ताकि वे हमेशा ठीक से काम करें। इन पहलों का उद्देश्य यह है कि ड्राइवर सुरक्षित और स्वस्थ रहें, जिससे उनका काम और भी बेहतर हो सके और उनके काम करने के जोखिमों को कम किया जा सके।
संदीप बजोरिया, वाइस प्रेसिडेंट, कोका-कोला इंडिया ने कहा, “भारत में लॉजिस्टिक्स का तरीका लगातार बदल रहा है और कोका-कोला भी इसी बदलाव के साथ आगे बढ़ रहा है। कोका-कोला का ट्रकों का नेटवर्क सिर्फ सामान पहुंचाने का नहीं, बल्कि तरक्की और बदलाव लाने का एक जरिया भी है। यह नेटवर्क पूरे देश में लोगों को नौकरी देता है, जिससे उनकी रोजी-रोटी चलती है। साथ ही, यह ट्रांसपोर्ट से जुड़ी छोटी-मोटी दुकानों को भी बढ़ावा देता है. इसी नेटवर्क की मदद से हमारे पेय पदार्थ बड़े शहरों से लेकर गांवों की छोटी दुकानों तक, हर जगह पहुँच पाते हैं। जैसे-जैसे हम अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं, हम उन लोगों की सुरक्षा, कौशल और मदद पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं जो इसे चलाते हैं।”
विनय नायर, चीफ कॉमर्शियल ऑफीसर, हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड ने कहा, “एचसीसीबी में, हम भारत में बेवरेजे की लगातार बढ़ रही मांगों को पूरा करने के लिए विकसित हो रहे हैं। गाडि़यों की संख्या में बढ़ोतरी न केवल हमारी लास्ट-माइल डिलीवरी को मजबूत करती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में भी योगदान करती है। इससे हमारे रिटेलर्स को तेजी से और बेहतर सेवा प्रदान करने वाले कुशल, टेक-इनेबल्ड सप्लाई चेन सॉल्यूशंस के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी मजबूत होती है।”
आशीष सेठी, सीईओ, सुपीरियर ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड ने कहा, “हमारा ध्यान हमेशा परिचालन सटीकता और बाजार तत्परता पर रहा है। इस विस्तार के साथ, हम एक डिलीवरी पावरहाउस बना रहे हैं जो बेजोड़ गति, पैमाना और विश्वसनीयता प्रदान करता है। हम विश्व की सबसे चुनौतीपूर्ण सप्लाई चेन में से एक के साथ तालमेल रखने के लिए अपने कार्य में नए मानक स्थापित कर रहे हैं।”
राहुल कुमार, डिप्टी चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफीसर, एसएलएमजी ने कहा, “हमारे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने से डिलीवरी की रफ्तार और क्षमता में सुधार होगा, और यह कोका-कोला के विकास लक्ष्यों से बिल्कुल मेल खाता है। इस निवेश से हम खासकर ग्रामीण बाजारों में उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा कर पाएंगे और हमारी लागत भी कम होगी।”
कोका-कोला के उत्पाद जब पूरे देश में सफर करते हैं, तो वे हर किलोमीटर सिर्फ ताजगी ही नहीं पहुँचाते, बल्कि लाखों भारतीयों के लिए नए अवसर, रोजगार और तरक्की भी लेकर आते हैं। कंपनी अपने ड्राइवरों की सेहत का भी पूरा ध्यान रखती है, और भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देती है, अर्थपूर्ण रोजगार प्रदान करती है और क्षेत्रों में समुदाय कल्याण को बढ़ावा देती है।