कितना सुकून महसूस किया
होगा तब
अपनी गुफा में मशाल के उजाले में आदिमानव ने
पहली बार चैन की नींद सोया होगा
घनघोर वृष्टि, ठंड की ठिठुरन में
गुफा में कैद हो
भित्तिचित्रों में उकेरी होगी शक्ति सामूहिकता की
मिलकर बेहतर जीवन जीने की आकांशा की
होगी तब
नुकीले हथियार से न्यूक तक
मशाल से मिसाइल तक
उजाले से ब्लैकआउट तक
क्या? इस अंजाम तक पहुंचने को यह सफर तय किया गया !
तब गुफा के बाहर था घनघोर जंगल
अब खिड़की के बाहर हैं कई संप्रभु देश
वैशाली सोनवलकर