महात्मा का नाम आते ही नजर के सामने एक चेहरा घूमने लगता है पीले कपड़ो में लिपटा सफेद दाढ़ी वाला एक बुजुर्ग सन्यासी ,पर मेरी नजर में ऐसा नही है(हो सकता है में गलत हूँ)। मेरी नजर में महात्मा वो है जो बिना पीले कपड़े पहने हुए भी, बिना मालिक का नाम लिए भी महान सच्चे कर्म करता है,वो बड़ा नास्तिक भी हो सकता है।
समय बदल गया ,युग बदल गया ,पर आज भी हमारी नजर में महात्मा, का मतलब होता है गुफाओं में छुपा बुजुर्ग पुजारी,पर उससे कही बड़ा महात्मा तो मुझे मजदूर लगता है जो भरी गर्मी में सुबह से शाम काम कर पसीना बहा कर अपने बच्चों को पालता है,वो गलत काम करने की कभी नही सोचता ,चाहे तो फावड़ा चलाने की जगह चाकू दिखाकर लूट कर अपने बच्चों को ऐश करा सकता है।
परन्तु आजकल उल्टा दिखता है जो ऐसे महात्मा है लोग उनको पागल समझते है। कहते है सारी उम्र पिसता रहा सच्चाई की राह पर चलता रहा,क्या किया इसने अपने परिवार के लिए,पर जो काली कमाई कर रहे है वो बड़े आदमी बन गए है,महात्मा बन गए हैं। उनके लिए जिनके मन्दिरो ,आश्रमो के लिए बड़ी बड़ी रसीदे काटते है,उनके लिए जिनके NGO के लिए बड़ा दान देते है।
आज कितना समय हो गया है रावण,कंस,दुश्शासन को गये हुए ,पर ये आज भी दिखते है ,हमारे समाज मे ,सब पापी दिखते है( बस रूप नाम बदल गया) लड़कियों को उठाते हुए ,उनका चीर हरण करते हुए ,उनको बेचते हुंए ,नही दिखता कही तो बस वो कृष्ण और राम। कही कोई भूले से दिख भी जाता है तो बस मजाक बन जाता है। पर ऐसा नही है ,मेरी नजर में राम तो आज भी है बस वो आत्माराम बन कर रह गया है,आत्मा में ही (आज की पीढ़ी को आत्मा राम का पता न होगा ,बुजुर्गों से पूँछे),शरीर मे प्रकट ही नही हो पाता।
सच मे तो हमने खुद ही अपने राम को आत्माराम बना दिया। क्यों नही हम उसको अपने शरीर मे लाते कृष्ण राम बनकर सामने आते हैं। इन रावणो को मारने के लिए। बुरा न मानना आप केमिस्ट हो ,जानते हो पर्ची पर लिखी दवाई कैसी है इस 1500 कि दवाई पर कितना कमीशन बटेगा,पर बोलते नही ,जरा ध्यान से देखो उस मरीज़ की आंखों में,उसकी मजबूरी को,कैसे उसकी मेहनत की कमाई को लूटा जा रहा है। भगवान रूपी डॉक्टर होने के बाद भी क्यों ऐसी जांचे करवाते हो जिसकी उस मरीज़ को जरूरत ही नही (ये तुम अच्छी तरह जानते हो)। पर ध्यान रखना आगे तुम्हारी भी जांचे होंगी ,तब ऊपर वाले को क्या जवाब दोगे।
आज भी अभी भी समय है ,अपनी आत्मा में सोए राम को जगाओ। हमारी आंखों के सामने ही सब कुछ हो रहा है पर हम किसी दूसरे के भरोसे आंख बंद कर लेते है। अगर वाकई ही महात्मा बनना है तो अपनी सोई हुई आत्मा को जगाओ,आवाज़ बुलंद करो ऐसे लोगो के खिलाफ,देखो फिर कोई माने या न माने तुम खुद अपनी नजर में ओर ऊपर वाले कि नजर में महात्मा बन जाओगे।
(इन विचारों के लिए आपके विचार सदर आमंत्रित है)
पंकज अम्बा 9829353757
Case Study
मैं अल्पना शर्मा ,जयपुर निवासी,आप सब को बताना चाहती हूँ कि एक बार जयपुर से बाहर से आने के बाद एक दम से मेरी कमर में इतना तेज दर्द हुआ कि मैं खड़ी भी नही हो पाई चींखें निकलती थी।
मेरे पैर की जांघ में आग सी निकलती थी,मैं अपने रोज के काम भी मुश्किल से कर पाती थी। कई डॉक्टरों को दिखया, दिल्ली भी गई पर मेरी बीमारी पकड़ में नही आई। हजारो रुपये खर्च किये मन्दिरो ,मस्ज़िदों के धागे बांधे ओर कुछ नही हुआ।
फिर एक दिन पंकज जी के बारे में पता लगा। उनके पास गई तो बोले कितने डॉक्टरों को दिखा लो कुछ नही होगा ।उनके उपाये से चमत्कार हुआ और मैं ठीक हो गई।मेैंने भगवान नही देखे पर मेेरे लिए तो यही भगवान है ।मैं उनको तहे दिल से धन्यावद देती हूँ।
अल्पना शर्मा 9837111543, 9314506842
