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सत्ता साधन है साध्य नहीं:तरुण भनोत

इंटरव्यू, देवांशु झारिया

आर्यावर्त के बेबाक सवाल, पूर्व वित्त मंत्री के सीधे जवाब

मध्य प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री पंडित तरुण भनोत ने कहा कि मेरे लिये राजनीति में सत्ता सदैव साधन रही है, साध्य नहीं। सत्ता में आने के बाद ये सुविधा अवश्य प्राप्त होती है कि व्यक्ति जनसेवा करने की महत्वाकांक्षा को विस्तार प्रदान कर सकता है,परंतु विपक्ष में रहकर भी सेवा का संकल्प पूर्ण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम भले ही अल्प समय के लिये सत्ता में रहे और वर्तमान में विपक्ष में हैं,लेकिन सेवा और समर्पण की धुन बरकरार है। अपनी स्पष्टवादिता के लिये जाने जाने वाले श्री भनोत ने आर्यावर्त न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में देश-प्रदेश की राजनीति और अन्य पहलुओं पर आए बदलावों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रश्न-जबलपुर के विकास की रफ्तार धीमी क्यों है।

उत्तर-आपका सवाल एकदम तर्कसंगत है,लेकिन आप ये गलत व्यक्ति से पूछ रहे हैं। ये सवाल आपको बीजेपी के नेताओं से पूछना चाहिए, जो बीते दो दशक से राज्य में सत्ता में हैं। 2018 में जब हम सत्ता में आए तो हमने शहर के प्रथम फ्लाईओवर का  निर्माण प्रारंभ कराया, जबलपुर में कैबिनेट मीटिंग बुलाई,जिसमें न केवल जबलपुर,बल्कि महाकोशल के विकास का खाका खींचा। 2019 का बजट मैंने वित्त मंत्री की हैसियत से स्वयं प्रस्तुत किया था, उसमें भी महाकोशल को प्रधानता के साथ विकास की परियोजनाओं में शीर्ष वरीयता दी थी। दुर्भाग्य से हम सत्ता में नहीं रहे। इसके बाद, बिना जनादेश की सरकार आई और उसने महाकोशल को दरकिनार कर दिया। ये पीड़ा आज भी मुझे परेशान करती है।

-आगामी विधानसभा चुनाव को आप कैसे देखते हैं।

उत्तर-आगामी विधानसभा चुनाव को मैं एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा हूं, जब कांग्रेस,भाजपा को बेनकाब करते हुये एक बार फिर से पूर्ण बहुमत का जनादेश लेकर सरकार बनाएगी और मध्य प्रदेश के विकास की नई इबारत लिखेगी। जनता वर्तमान भाजपा सरकार से त्रस्त है। कमलनाथजी के विजन और त्वरित क्रियान्वयन  ने सिर्फ 15 महीने में ही जनता का भरोसा जीत लिया था। कमलनाथजी का साथ, नेताओं का समर्पण और कार्यकर्ताओं का साहस एक बार फिर से भाजपा को प्रदेश की सत्ता से बेदखल करने संकल्पित है।

प्रश्न-तरुण भनोत की राजनीतिक महत्वाकांक्षा क्या है

उत्तर-मेरी केवल एक ही महत्वाकांक्षा है कि मैं कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में जनता की सेवा में पूरी निष्ठा के साथ समर्पित रहंू। पद रहे न रहे, सत्ता रहे न रहे,लेकिन मेरे और जनता के बीच में किसी तरह की दूरी न आए। जबलपुर की माटी से जन्मा हंू और मध्य प्रदेश मेरा परिवार है। यहां की जनता मेरे लिये सर्वस्व है। जिस पद पर रहकर मैं अपनी जनता से दूर हो जाउं, वो पद मैं हरगिज स्वीकार नहीं करूंगा, ये मेरा वचन है।

-क्या भाजपा के महाकोशल में विशेष सक्रिय होने से कांग्रेस को मुश्किल होगी

उत्तर-बहुत अच्छा सवाल किया है आपने। महाकोशल में भाजपा के सक्रिय होने की टाइमिंग देखिए आप। ऐन चुनाव के मौके पर इन्हें महाकोशल की याद आई है। असल में इनकी नीयत में जनसेवा की निष्ठा नहीं है, ये केवल और केवल सत्ता के लिये लालायित है। जनता सब जानती

है और इन्हें बहुत अच्छे से परख

चुकी है। इनकी चाल, चेहरा और चरित्र की कलई खुल चुकी है। चुनाव में मतदाता न्याय करेंगे। प्रश्न-महाकोशल के विकास की क्या तस्वीर है आपके जेहन में।

उत्तर-जबलपुर सहित संपूर्ण महाकोशल में सर्वप्रथम देश की दिग्गज कंपनियों का निवेश लाना मेरी प्राथमिकता है ताकि यहां के युवा को यहीं पर रोजगार मिले और युवाओं का पलायन रुक सके। दूसरे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का इस स्तर तक विस्तार करना कि जनता को दूसरे शहरों का मुंह न ताकना पड़े। पूरे महाकोशल को तकनीकी और रोजगार मूलक शिक्षा संस्थानों से जोड़ना भी बेहद आवश्यक है,क्योंकि बिना शिक्षा के रोशनी की उम्मीद नहीं की जा सकती। अभी जबलपुर को एक फ्लाईओवर मिला है। ऐसी और सौगातें न केवल जबलपुर,बल्कि महाकोशल के अन्य नगरों को उपलब्ध कराना। मेरी इच्छा है कि ये स्वप्न मैं अवश्य पूर्ण करूंगा।

 प्रश्न-सत्ता और सेवा में क्या संबंध है।

उत्तर-जब आप सत्ता और सेवा को राजनीतिक चश्मे से देखना प्रारंभ करते हैं तब कठिनाईयां उत्पन्न होती हैं अन्यथा सत्ता केवल सेवा के लिये ही है। अब देखिए, एक विधायक रहते हुये मैं अपने पश्चिम विधानसभा के लोगों की हरसंभव सेवा कर रहा हूं,लेकिन यदि मैं महाकोशल के लिये कुछ करना चाहूं तो मुझे कठिनाई होगी,क्योंकि मैं सरकार के लिये विपक्ष का विधायक हूं। सत्ता होने के बाद आप व्यापक सोच सकते हैं और उसे कार्यरूप में परिणित भी कर सकते हैं। बिना सत्ता के आप साधनविहीन हैं,जबकि लोकतांत्रिक रूप से देखें तो ये सर्वथा अनुचित है।

प्रश्न-क्या आप मणिशंकर अय्यर के बयान से सहमत हैं।

उत्तर-मणिशंकर अय्यरजी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधीजी के साथ उन्होंने बहुत अच्छी भूमिका निभाई,वे मेरे सम्मानीय हैं। उनके बयान की बात करें तो पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा रावजी का भी मैं अत्यंत आदर करता हूं। मुझे ऐसा लगता है कि श्री अय्यर के बयान पर मेरी टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न-राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति में सुधार हुआ है।

उत्तर- किसी भी राजनैतिक दल के लिये पांच या दस साल की अवधि कोई मायने नहीं रखती। भारतीय राजनीति के इतिहास में ऐसे कई अवसर आए हैं,जब प्रतीत हुआ कि अब सब कुछ बदलने वाला है,परंतु कांग्रेस ने फिर वापिसी की। दरअसल, कांग्रेस के पार्टी से इतर एक परिवार है, वो सभी विचारधाराओं और देश के प्रत्येक व्यक्ति की अभिव्यक्ति का साझा मंच है। समय के साथ कुछ कमियां सब में आ जाती हैं, उसे हम दूर करने में जुट गए हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे सब कुछ स्पष्ट कर देंगे। हाल ही राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खड़गे ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी का गठन किया है। उस कमेटी में वरिष्ठों के साथ युवाओं और यहां तक कि असंतुष्ट माने जा रहे नेताओं को भी बराबर का स्थान दिया है। कांग्रेस इस देश के रक्त में रची-बसी है इसलिये अंतत: यही वो पार्टी है,जो देश को शंाति और अहिंसा के रास्ते शीर्ष पर ले जा सकती है इसलिये आगामी लोकसभा के नतीजों की प्रतीक्षा कीजिए।

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