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भारत को मिलेगा सिंधु नदी का अधिक जल, बनेगी 113 KM लंबी नहर; पाकिस्तान पर मंडराया जल संकट

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में भारत सरकार ने तय किया है कि वह सिंधु नदी प्रणाली के अपने अधिकार क्षेत्र के जल का अधिकतम उपयोग करेगी। इसके तहत 113 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जाएगी, जिससे जम्मू-कश्मीर, पंजाब, और हिमाचल प्रदेश के किसानों को सीधा लाभ होगा।

सरकार की इस योजना का उद्देश्य न केवल सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना है, बल्कि इससे जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति की स्थिति भी सुधरेगी। इससे पाकिस्तान को मिलने वाले पानी की मात्रा में कमी आएगी, जो पहले से ही जल संकट का सामना कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने अब तक समझौते के तहत अपने हिस्से का पूरा उपयोग नहीं किया है, लेकिन अब समय आ गया है कि देश के जल संसाधनों का अधिकतम लाभ लिया जाए।

योजना की मुख्य बातें:

  • सिंधु जल समझौते के तहत भारत को पूर्वी नदियों – रावी, सतलुज और ब्यास – का जल उपयोग करने का पूरा अधिकार है।

  • अब भारत पश्चिमी नदियोंसिंधु, झेलम और चिनाब – पर भी अपनी वैध परियोजनाओं को गति देगा।

  • प्रस्तावित नहर परियोजना से लगभग 5 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

  • यह कदम पाकिस्तान के लिए एक नया जल संकट पैदा कर सकता है, क्योंकि वह पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहा है।

यह निर्णय भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना देश की कृषि उत्पादकता को बढ़ावा दे सकती है।

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