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‘मिडिल ईस्ट में जो हो रहा है, वह बहुत असामान्य है..’, अमेरिका-ईरान की जंग पर बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

अमेरिकी और इजरायल की ओर से ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हमले लगातार जारी हैं। तो वहीं, ईरान भी बदले की आग में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष पर अब भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान सामने आया है।अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग में पूरा मिडिल ईस्ट जल रहा है। इजरायल और अमेरिका आसमान से ही ईरान में भारी तबाही मचा रहे हैं। ईरान की राजधानी तेहरान में भारी तबाही देखने को मिल रही है। तो वहीं, ईरान भी इजरायल के अलावा मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल से लगातार हमले कर रहा है। इसके अलावा ईरान पर अब जमीनी हमला भी कभी भी शरू हो सकता है। इन सब के बीच मिडिल ईस्ट के हालात पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी बयान सामने आया है।
मिडिल ईस्ट के हालात असामान्य- राजनाथ सिंह
कोलकाता में मैरीटाइम कॉन्क्लेव “सागर संकल्प” को संबोधित करते हुए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- “मिडिल ईस्ट में जो हो रहा है, वह बहुत असामान्य है। आगे चलकर मिडिल ईस्ट में, या हमारे पड़ोस में परिस्थितियां किस दिशा में जाएंगी, इस पर अभी ठोस टिप्पणी करना कठिन है। यदि हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या पूरे पर्शियन गल्फ क्षेत्र को देखें, तो यह विश्व की ऊर्जा सुरक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जब इस क्षेत्र में disturbance या disruption होता है, तो उसका सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है। यही नहीं, आज हम सप्लाई चेन में व्यवधान केवल ऊर्जा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी देख रहे हैं। इन अनिश्चितताओं का सीधा प्रभाव, अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।”

हम सभी के लिए काफी चिंता की बात- राजनाथ सिंह
मिडिल ईस्ट का जिक्र करते हुए रथा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा- क्षेत्र में वर्तमान स्थिति काफी जटिल हो गई है, और ऐसा लगता है कि भविष्य में यह और भी अधिक डायनैमिक हो जाएगी। जिस तरह से अनेक देश जमीन पर, हवा में, समुद्र में और अब अंतरिक्ष में भी एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, यह वास्तव में हम सभी के लिए काफी चिंता की बात है। मुझे इससे भी ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह Abnormality (असामान्यता) न्यू नॉर्मल होता जा रहा है।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- “आज मैरिटाइम डोमेन (समुद्री डोमेन) पहले की तुलना में, काफी बदल चुका है। आज के समय में मैरिटाइम डोमेन, केवल ट्रेड रूट या नौसैनिक ताकत तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह राष्ट्रीय लचीलापन, आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक स्वायत्तता का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। आज आवश्यकता है तो निरंतरता की, समन्वय की और राष्ट्रीय संकल्प की। यदि हम सब मिलकर, मैरिटाइम विजन को आगे बढ़ाएं, तो आने वाले वर्षों में, भारत न केवल अपने हितों की रक्षा करेगा, बल्कि वैश्विक समुद्री स्थिरता में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।”

रक्षा मंत्री ने बताया भारत का दायित्व
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- “बदलती ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स के इस दौर में, समुद्र एक बार फिर विश्व की पॉवर बैलैंस के केंद्र में आ गए हैं। ऐसे समय में, एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में, भारत का यह दायित्व है कि वह confidence, capability और clear vision के साथ नेतृत्व प्रदान करे।”

आत्मनिर्भरता सिर्फ एक नारा नहीं- राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा- “आज स्थिति यह है कि हम जिस आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ आगे बढ़े थे, उसके सकारात्मक परिणाम हमारे सामने है। आज भारतीय नौसेना के लिए भी, जितने वॉरशिर और सबमरीन ऑर्डर पर हैं, वे सभी भारतीय शिपयार्ड्स में बन रही हैं। आज हम design, engineering, construction और lifecycle support तक की पूरी क्षमता, अपने भीतर विकसित कर रहे हैं। यही तो आत्मनिर्भरता का वास्तविक अर्थ है। जब हम कहते हैं कि हम Builder’s Navy बन चुके हैं, तो यह कोई नारा नहीं है, यह जमीनी हकीकत है। आत्मनिर्भरता हमारे लिए केवल एक नारा नहीं रही बल्कि एक व्यावहारिक वास्तविकता के रूप में स्थापित हो रही है।”

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