सुनते हैं कि....

एनजीओ संचालिका का IAS डॉटर कनेक्शन-करोड़ों की फंडिंग  

राजधानी में खुद को समाजसेवी बताने वाली एक महिला...

‘मेरे पापा पावरफुल’

राजधानी भोपाल में बन रहे अत्याधुनिक बीजेपी दफ्तर को...

हिंदुत्व का असली रक्षक कौन?

2024 के आम चुनावों में बीजेपी अपने ट्रंप कार्ड...

बलूचिस्तान में तनाव बढ़ा: बीएलए के हमलों से पाकिस्तान और चीन की चिंता, ग्वादर पोर्ट और सीपीईसी पर खतरा मंडराया

नई दिल्ली, 19 मार्च 2025: पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में हाल के दिनों में हिंसा और अशांति ने एक बार फिर क्षेत्रीय स्थिरता को चुनौती दी है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) की ओर से किए गए हमले, जिसमें 11 मार्च 2025 को जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण का मामला शामिल है, ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और चीनी निवेशों को निशाना बनाया है। इस 36 घंटे के गतिरोध में कम से कम 26 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबरें हैं, हालांकि इसकी पुष्टि अभी होनी बाकी है।
बलूचिस्तान, जो अफगानिस्तान, ईरान और अरब सागर से घिरा हुआ है, अपनी विशाल क्षेत्रफल के बावजूद कम आबादी वाला प्रांत है। इसका रणनीतिक महत्व इसकी सीमा और चीनी निवेशों, जैसे ग्वादर पोर्ट और 65 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के कारण बढ़ गया है। हालांकि, स्थानीय बलूच समुदाय इन निवेशों को अपनी संप्रभुता और संसाधनों की लूट के रूप में देखता है, जिसके चलते बीएलए ने चीनी बुनियादी ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं।
इतिहास में, 1947 में बलूचिस्तान को स्वतंत्र घोषित किया गया था, लेकिन मुहम्मद अली जिन्ना ने 1948 में इसे जबरन पाकिस्तान में मिला लिया, जिसने आजादी की मांग को हवा दी। बीएलए, जो 1970 में स्थापित हुआ और अब 7,000 से अधिक लड़ाकों के साथ अपनी सेना और नौसैनिक अड्डों का दावा करता है, पिछले कई दशकों से प्राकृतिक गैस और ऊर्जा संसाधनों के शोषण के खिलाफ संघर्ष कर रहा है।
पाकिस्तान, बीएलए पर भारत, ईरान और तालिबान से समर्थन लेने का आरोप लगाता है, जबकि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ईरान और पाकिस्तान के बीच 2024 में सीमा पर हमले हुए, और अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता के बाद से पाकिस्तान-तालिबान संबंध भी तनावपूर्ण हैं। दूसरी ओर, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1940 के दशक में बलूच नेताओं की मदद की अपील को नजरअंदाज कर दिया था, जो अब भी एक ऐतिहासिक शिकायत बनी हुई है।
वर्तमान में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बलूचिस्तान की अस्थिरता पर नजर रख रही है, क्योंकि सीपीईसी और ग्वादर पोर्ट भारत की रणनीतिक चिंताओं को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में अस्थिरता से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भी बदलाव आ सकता है, जो भारत के लिए एक अनुकूल स्थिति पैदा कर सकता है।
इस बीच, चीनी निवेशों पर खतरे के बीच पाकिस्तान और चीन मिलकर आतंकवादियों को खत्म करने की रणनीति बना रहे हैं। हालांकि, बीएलए के बढ़ते हमले और स्थानीय असंतोष से क्षेत्रीय शांति पर गहरा असर पड़ रहा है।

संबंधित समाचार

अंगुल रथ यात्रा उत्सव में शामिल हुए नवीन जिन्दल; जिंदल फाउंडेशन ने पुरी में 12वें वार्षिक ‘अन्न सेवा’ कार्यक्रम की शुरुआत की

दस से अधिक वर्षों से, फाउंडेशन की यह रथ यात्रा सेवा सहानुभूति और साझा जिम्मेदारी का प्रतीक रही है। यह कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि जब पवित्र यात्रा के लिए पुरी में लाखों लोग एकत्रित हों, तो कोई भी श्रद्धालु भूखा न रहे।

नवीन जिन्दल समूह ने 18 गीगावाट की परमाणु परियोजनाओं के लिए 9 से अधिक राज्यों में संभावनाएं तलाशना शुरू किया

स्टील, खनन, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा और रियल एस्टेट क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बाद नवीन जिन्दल समूह अब परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कदम रख रहा है। इसके लिए 'जिन्दल रिन्यूएबल्स' की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी 'जिन्दल न्यूक्लियर पावर प्राइवेट लिमिटेड' का गठन किया गया है।

इटानगर में लोगों की बात सुनकर बोले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह– हर पीड़ित परिवार तक मदद पहुंचाकर ही चैन लेंगे

पूर्वोत्तर के दौरे में केंद्रीय मंत्री श्री किरन रिजिजू और मुख्यमंत्री भी साथ, अरुणाचल में अधिकारियों की बैठक भी लेंगे शिवराज सिंह चौहान*इटानगर/गुवाहाटी/नई दिल्ली,...

ताज़ा समाचार

अंगुल रथ यात्रा उत्सव में शामिल हुए नवीन जिन्दल; जिंदल फाउंडेशन ने पुरी में 12वें वार्षिक ‘अन्न सेवा’ कार्यक्रम की शुरुआत की

दस से अधिक वर्षों से, फाउंडेशन की यह रथ यात्रा सेवा सहानुभूति और साझा जिम्मेदारी का प्रतीक रही है। यह कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि जब पवित्र यात्रा के लिए पुरी में लाखों लोग एकत्रित हों, तो कोई भी श्रद्धालु भूखा न रहे।

नवीन जिन्दल समूह ने 18 गीगावाट की परमाणु परियोजनाओं के लिए 9 से अधिक राज्यों में संभावनाएं तलाशना शुरू किया

स्टील, खनन, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा और रियल एस्टेट क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बाद नवीन जिन्दल समूह अब परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कदम रख रहा है। इसके लिए 'जिन्दल रिन्यूएबल्स' की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी 'जिन्दल न्यूक्लियर पावर प्राइवेट लिमिटेड' का गठन किया गया है।

Jyotiraditya M. Scindia Reviews Flood Situation Across Northeast, Assures Full Central Support

*Ministry of Development of North Eastern Region Closely...

सोशल मीडिया पर जुड़ें

560FansLike
245FollowersFollow
285FollowersFollow
320SubscribersSubscribe

विज्ञापन

spot_img