मैकाले शिक्षा मॉडल को चुनौती
स्वर्गीय न्यायाधीश ऋषि तिवारी की पुण्य स्मृति में, ऋषिकेश फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘ऋषिकेश रत्न अलंकरण समारोह’ का सफल आयोजन आज उत्कृष्ट विद्यालय, सीधी में किया गया। इस गरिमामय समारोह का उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान, कला और कौशल को यथोचित सम्मान देना था, जो आज भी भारतीय शिक्षा प्रणाली पर हावी मैकाले शिक्षा मॉडल की औपचारिकता से परे है। यह समारोह उस विचार को चुनौती देने का एक लघु प्रयास था, जो बच्चों को केवल ‘पेटजीवी’ बनाकर पूँजीपतियों का चाकर बनाने को तत्पर है।
इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित लोक कलाकार अर्जुन सिंह धुर्वे जी ने मुख्य अतिथि, और गांधीवादी चिंतक एवं कलाधर्मी संतोष कुमार द्विवेदी जी ने अध्यक्ष के रूप में मंच की शोभा बढ़ाई। समारोह में सेवानिवृत्त अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुनील मिश्रा जी, व्यवहार न्यायाधीश शुभांशु ताम्रकार जी, सुप्रसिद्ध काष्ठ कलाकार दलपत सिंह बीजापुरी जी और प्रख्यात लोक गायिका भागवती रठुड़िया जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समारोह में विभिन्न कला क्षेत्रों की लगभग पचास उत्कृष्ट प्रतिभाओं को ‘ऋषिकेश रत्न अलंकरण’ से विभूषित किया गया। इनमें मूर्तिकार, बांस शिल्पी, मृदा शिल्पी, चर्म शिल्पी, गायक, वाद्ययंत्र वादक, पाककलाकार और चित्रकार आदि शामिल थे, जिन्होंने अपनी कला और श्रम से समाज को समृद्ध किया है। इसके अतिरिक्त, नौ विशिष्ट अतिथियों को विशेष स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी आकर्षक बना दिया। बघेलखंड की विशिष्ट लोक कलाओं का प्रदर्शन हुआ, जिसमें नन्हे लाल घासी के नेतृत्व में बारह कलाकारों द्वारा गुदुम बाजा नाच, तिरान्नवे वर्षीय शम्भू प्रजापति के नेतृत्व में कोहराई कबीर गायन, और शिवबालक बैगा द्वारा नकसुर वादन की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। सृजन मिश्रा ने हारमोनियम और श्लोक तिवारी ने तबले पर संगत देते हुए भजन गायन भी प्रस्तुत किया।
यह समारोह केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उन गुमनाम प्रतिभाओं को पहचान देने का एक प्रयास है, जो अपनी कला और कौशल के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। ऋषिकेश फाउंडेशन का यह लघु प्रयास पारंपरिक ज्ञान और रचनात्मकता को सम्मान देकर एक नई दिशा की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।
सादर प्रकशनार्थ
प्रवक्ता
ऋषिकेश फाउंडेशन




