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नूरपुर बेदी के पहाड़ी क्षेत्र को सिंचाई योग्य पानी देने संबंधी दो कंपनियों की प्रोजैक्ट रिपोर्ट निगरान इंजीनियरों की कमेटी के विचाराधीन:

कहा, तकनीकी संभावना और फंडों की उपलब्धता अनुसार आवश्यक कार्रवाई करके प्रोजैक्ट रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग की मंज़ूरी के लिए भेजी जाएगी

चंडीगढ़, 24 मार्चः

पंजाब के जल संसाधन मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज विधानसभा को जानकारी दी कि ज़िला रूपनगर के ब्लॉक नूरपुर बेदी के 75 गांवों को सिंचाई के लिए नहरी पानी देने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही इस संबंध में कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

रोपड़ से विधायक श्री दिनेश कुमार चड्डा द्वारा पूछे गए सवाल कि ज़िला रोपड़ के 75 गांवों को सिंचाई के लिए नहरी पानी देने के लिए की जाने वाली फिज़ीबिलिटी स्टडी का क्या स्टेटस है, के जवाब में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस संबंध में दो एजेंसियों द्वारा रुचि की अभिव्यक्ति (ई.आई.ओ) प्रस्ताव पेश किए गए हैं, जो अंतिम फैसले के लिए उच्च अधिकारियों की कमेटी के पास समीक्षा अधीन है। उन्होंने कहा कि तकनीकी संभावना और फंडों की उपलब्धता के अनुसार आगे आवश्यक कार्रवाई करके इस संबंध में केंद्रीय जल आयोग को मंज़ूरी के लिए आगे भेजा जाएगा।

श्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि प्रोजैक्ट की व्यवहार्यता की जांच के लिए दो बार रुचि की अभिव्यक्ति (ई.आई.ओ) नोटिस जारी किए गए। इस प्रक्रिया में दो एजेंसियों ने हिस्सा लिया था। हालाँकि जब एजेंसियों से प्रोजैक्ट को विस्तृत विवरण देने के लिए कहा गया, तो वे संतोषजनक उत्तर देने में असफल रहीं। तब ई.आई.ओ. को रद्द करना पड़ा और फिर से ई.आई.ओ. जारी किया गया जिसमें पुनः दो एजेंसियों ने आवेदन किया था।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र पहाड़ी है और प्राकृतिक चौओं से घिरा हुआ है। ऊँचा होने के कारण इस क्षेत्र के लिए नहरी प्रणाली के माध्यम से सिंचाई योग्य जल प्रदान करना संभव नहीं है। इसलिए समूचे प्रोजैक्ट और इसके प्रभावों का पता लगाने के लिए कि इस क्षेत्र में पानी कैसे पहुँचाया जा सकता है, इसके लिए ई.आई.ओ. जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में संभावित स्रोत तीन प्रकार के हैं, जिनसे पानी पहुँचाया जा सकता है। इनमें से पहले नंगल डैम से पाइप नेटवर्क के माध्यम से या डैम से लिफ्टिंग के द्वारा पानी लेकर वहाँ पहुँचाया जा सकता है। दूसरा सवां नदी से पानी लेकर स्टोर करके पानी पहुँचाया जा सकता है, लेकिन इसमें दिक्कत यह है कि सवां नदी मॉनसून में चलती है और तीन-चार महीनों बाद वहाँ पानी नहीं होता। तीसरा तरीका श्री आनंदपुर साहिब हाइडल चैनल से साइलोस के माध्यम से या ओवरहेड सर्विस रिज़र्वियर के माध्यम से पानी एकत्र करके उसे लिफ्टिंग के द्वारा इस क्षेत्र को दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इनमें से बेहतर तरीके का चुनाव करने के लिए ही ई.आई.ओ. टेंडर जारी किया गया था।

उन्होंने बताया कि एजेंसियों की प्रोजैक्ट रिपोर्ट अंतिम फैसले के लिए निगरान इंजीनियरों की कमेटी के पास समीक्षा अधीन है। निगरान इंजीनियर सारी स्टडी करेंगे और उसके बाद इसकी फिज़ीबिलिटी चेक करवाकर आगे की कार्रवाई के लिए केंद्रीय जल आयोग को भेजा जाएगा।

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