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न्यू लेबर कोड से TCS, Infosys, HCLTech को लगा तगड़ा झटका; Q3 में खर्च हुए 4373 करोड़ रुपये

देश के आईटी सेक्टर के लिए दिसंबर तिमाही किसी बड़े झटके से कम नहीं रही। बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करने के मकसद से लागू किए गए नए लेबर कोड्स ने देश की दिग्गज आईटी कंपनियों की तिमाही कमाई पर भारी असर डाला है।देश के आईटी सेक्टर के लिए वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही राहत नहीं बल्कि बड़ा झटका लेकर आई। नवंबर 2025 में लागू हुए नए लेबर कोड्स ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys) और एचसीएलटेक (HCLTech) जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डाला है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में इन तीनों कंपनियों को कुल मिलाकर 4373 करोड़ रुपये का ज्यादा खर्च उठाना पड़ा, जिससे इनके तिमाही मुनाफे में दोहरे अंकों की तेज गिरावट दर्ज की गई।सबसे बड़ा झटका टीसीएस को लगा, जिसने दिसंबर तिमाही में 2128 करोड़ रुपये के एक्सेप्शनल एक्सपेंस दर्ज किए। कंपनी के मुताबिक इसमें से करीब 1800 करोड़ रुपये ग्रेच्युटी से जुड़ी देनदारियों और लगभग 300 करोड़ रुपये लीव लायबिलिटी एडजस्टमेंट पर खर्च हुए। वहीं इंफोसिस को नए लेबर कोड्स के चलते 1289 करोड़ रुपये का एक्सेप्शनल शॉक लगा, जबकि एचसीएलटेक पर इसका असर 956 करोड़ रुपये का रहा।

मार्जिन पर सीमित असर
हालांकि इस भारी-भरकम खर्च के बावजूद कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर पूरी तरह नेगेटिव नहीं रहा। टीसीएस ने 25.2% का ऑपरेटिंग मार्जिन बनाए रखा। इंफोसिस का ऑपरेटिंग मार्जिन तिमाही आधार पर घटकर 18.4% पर आ गया, जबकि कंपनी का कहना है कि यदि नए लेबर कोड्स से जुड़ी अतिरिक्त लागत नहीं होती तो यह मार्जिन 21.2% तक रह सकता था। एचसीएलटेक ने भी माना कि लेबर कोड से जुड़े एडजस्टमेंट का असर सीमित दायरे में ही रहेगा।

लेबर कोड के बड़े बदलाव
नवंबर 2025 से लागू हुए नए लेबर कोड्स के तहत आईटी और आईटीईएस सेक्टर में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इनमें कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 50% बेसिक सैलरी, पीएफ और ग्रेच्युटी जैसे सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स का विस्तार, तय वर्किंग ऑवर्स और अनिवार्य नियुक्ति पत्र शामिल हैं। इसके अलावा महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति देकर उनकी आय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

आगे बढ़ेगी लागत चुनौती
कंपनियों का कहना है कि यह खर्च आगे भी जारी रह सकता है, लेकिन इसका असर 10 से 20 बेसिस प्वाइंट्स के बीच सीमित रहने की उम्मीद है। वहीं ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि नए लेबर कोड्स से आईटी कंपनियों की रिकरिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे आने वाले वर्षों में मार्जिन पर दबाव और सैलरी हाइक की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। ऐसे में आईटी सेक्टर के लिए यह बदलाव लंबे समय तक चुनौती बना रह सकता है।

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