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चुनाव से पहले बड़ी तैयारी: जन सुराज पार्टी को मिला चुनाव चिह्न, प्रशांत किशोर को मिली बड़ी राहत

बिहार की सियासत में एक बड़ा मोड़ आया है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज को आधिकारिक चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया है। इस फैसले के साथ ही जन सुराज पार्टी अब औपचारिक रूप से राज्य की चुनावी राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने को तैयार है।

क्या है मामला?

जन सुराज पार्टी, जिसकी स्थापना प्रशांत किशोर ने बिहार में बदलाव की नीयत से की थी, अब तक एक आंदोलन और जन अभियान के रूप में सक्रिय थी। लेकिन अब चुनाव आयोग से पार्टी को वैधानिक मान्यता और चुनाव चिह्न मिलने के बाद यह एक पूर्ण राजनीतिक दल के रूप में चुनावी मैदान में उतरने जा रही है।

चुनाव आयोग ने जन सुराज को जो चिह्न आवंटित किया है, वह अब सभी आधिकारिक दस्तावेजों, पोस्टरों, बैनरों, और ईवीएम में दिखेगा। इससे मतदाताओं को पार्टी को पहचानने में सहूलियत होगी और पार्टी का चुनावी प्रचार भी व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ेगा।

जन सुराज की तैयारी 

प्रशांत किशोर पिछले दो वर्षों से बिहार में घर-घर जाकर ‘जन संवाद यात्रा’ कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश के 30,000 से अधिक गांवों का दौरा कर आम जनता की समस्याओं को सुना, समझा और अपने मिशन को “जनता की सरकार, जनता के लिए” के रूप में पेश किया।

अब जब पार्टी को आधिकारिक चुनाव चिह्न मिल गया है, तो जन सुराज की रणनीति और आक्रामक होगी। संगठन विस्तार, उम्मीदवार चयन, और मुद्दा आधारित कैंपेनिंग पर पार्टी का पूरा फोकस रहेगा।

प्रशांत किशोर का बयान

“यह जनता की जीत है। जन सुराज अब केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि एक विकल्प बन चुका है। अब हम बिहार की राजनीति में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे।”

राजनीतिक असर क्या होगा?

जन सुराज को अब एक वैकल्पिक राजनीतिक ताकत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषकर युवा और ग्रामीण मतदाता वर्ग में पार्टी की अच्छी पकड़ मानी जा रही है। चिह्न मिलने के बाद पार्टी अब अन्य दलों के बराबर चुनावी मैदान में उतर सकेगी, जिससे आने वाले चुनाव में मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है।

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