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मध्य प्रदेश में जातिगत समीकरणों के आधार पर होगी कांग्रेस संगठन में नियुक्ति पिछड़ा वर्ग, SC-ST को मिलेगा मौका

भोपाल: मध्य प्रदेश जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्ति करेगी। अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग का प्रतिनिधित्व हर स्तर पर बढ़ाया जाएगा। जिला और ब्लाक इकाइयों के अध्यक्षों की नियुक्ति में इसका ध्यान रखा जाएगा। कांग्रेस में अभी 72 जिला अध्यक्षों में रिक्त पदों को छोड़कर 30 सामान्य, 21 अन्य पिछड़ा वर्ग, सात अनुसूचित जनजाति, दो अनुसूचित जाति और नौ अल्पसंख्यक हैं। प्रदेश पदाधिकारियों में 30 सामान्य, आठ पिछड़ा वर्ग, पांच अल्पसंख्यक और दो-दो अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के हैं।

आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने की कवायद
राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पिछड़ा वर्ग की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है। उसके अनुसार पार्टी में प्रतिनिधित्व नहीं है। यही स्थिति अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को लेकर भी है।

आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने की मांग कांग्रेस पुरजोर तरीके से कर रही है। यही कारण है कि संगठन में भी इसे लागू किया जाएगा ताकि अपनी बात प्रमाणिकता के साथ जनता के सामने रख सके।

पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ जिले आदिवासी बहुल हैं लेकिन अन्य वर्गों की भूमिका को नजरंदाज भी नहीं किया जा सकता है। इसी तरह की स्थितियां अन्य जिलों में भी हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लिए जाएंगे।

प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले का कहना है कि पार्टी नेता राहुल गांधी बहुत स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि संगठन में संतुलन बनाया जाना आवश्यक है।

हमारे यहां लगभग 12 जिले ऐसे हैं, जहां लगभग 80 विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित हैं। यहां दूसरे वर्गों का भी ध्यान रखना होता है। प्रदेश की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएंगे।

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