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Budget 2026: कृषि सेक्टर की बड़ी मांग, डिजिटल और क्लाइमेट-स्मार्ट खेती को मिले प्राथमिकता, जताई ये उम्मीदें

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026-27 कृषि को केवल एक कल्याणकारी क्षेत्र के बजाय आर्थिक विकास के मजबूत इंजन के रूप में स्थापित करने का एक खास मौका है।आगामी 1 फरवरी को आने वाले आम बजट से पहले कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत के नेताओं और विशेषज्ञों ने सरकार से डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, जलवायु-स्मार्ट खेती और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए निवेश बढ़ाने की जोरदार मांग की है। उनका कहना है कि इन कदमों से उस क्षेत्र में व्यापक बदलाव आ सकता है, जो देश की लगभग आधी आबादी को रोजगार देता है, लेकिन राष्ट्रीय उत्पादन में जिसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भारत की करीब 45 प्रतिशत कार्यशील आबादी लगी हुई है, जबकि सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में इसका योगदान लगभग 18 प्रतिशत ही है। कृषि अब आर्थिक विकास का एक विश्वसनीय माध्यम
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026-27 कृषि को केवल एक कल्याणकारी क्षेत्र के बजाय आर्थिक विकास के मजबूत इंजन के रूप में स्थापित करने का अहम अवसर प्रदान करता है। अर्न्स्ट एंड यंग इंडिया में GPS–एग्रीकल्चर, लाइवलीहुड, सोशल और स्किल्स के लीडर अमित वात्स्यायन ने कहा कि कृषि को अब सिर्फ कल्याण के नजरिये से नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे आर्थिक विकास के एक विश्वसनीय माध्यम के रूप में पहचाना जा रहा है, जो उत्पादकता, रोजगार, ग्रामीण मांग और लचीलापन बढ़ा सकता है।

डेयरी सेक्टर ने रखीं खास मांगें
हेरिटेज फूड्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक ब्रह्माणी नारा ने सितंबर 2025 में हुए जीएसटी युक्तिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पनीर, चीज़, घी और मक्खन जैसे हाई-प्रोटीन व स्वास्थ्य-केंद्रित उत्पादों की मांग संगठित डेयरी बाजार में तेजी से बढ़ी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन और नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से अब तक 3 लाख से अधिक किसान संगठित डेयरी इकोसिस्टम से जुड़ चुके हैं।

बजट से उनकी प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल हैं:

पशु उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे और क्रोमोसोम-सॉर्टेड सीमेन पर सब्सिडी।
देश में पशु चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए पशु चिकित्सा कॉलेजों की क्षमता का विस्तार, ताकि 68,000 से बढ़ाकर 1.10–1.20 लाख पशु चिकित्सक तैयार किए जा सकें।
विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए मिनी डेयरी इकाइयों पर पूंजीगत सब्सिडी में वृद्धि।
हरित अवसंरचना और तकनीक पर निवेश की जरूरत।
कृषि परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ाने पर जोर दे सरकार
अमित वात्स्यायन ने माइक्रो-इरिगेशन, वॉटरशेड प्रबंधन, एक्विफर रिचार्ज और नवीकरणीय ऊर्जा आधारित कृषि परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि ये कदम न केवल जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगे। उन्होंने कहा कि विकास के दृष्टिकोण से ये पहलें मजबूत मल्टीप्लायर की तरह काम करती हैं, ग्रामीण मांग को बढ़ाती हैं, किसानों की आय को स्थिर करती हैं और खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ बनाती हैं।

इसके साथ ही उन्होंने भंडारण, लॉजिस्टिक्स और कृषि अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में सार्वजनिक-निजी भागीदारी बढ़ाने, पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम करने और दालों व पोषण-संवेदनशील फसलों में आत्मनिर्भरता के लिए बीज प्रणालियों में निवेश की आवश्यकता बताई। जापान के ‘फार्मर स्कूल मॉडल’ का हवाला देते हुए उन्होंने एफपीओ और कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़े क्लस्टर-आधारित किसान स्कूलों को अपनाने का सुझाव भी दिया।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिले बढ़ावा
मैपमायक्रॉप के संस्थापक और सीईओ स्वप्निल जाधव ने कहा कि प्रिसीजन एग्रीकल्चर को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान क्रेडिट व्यवस्था बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एग्री-ड्रोन, IoT सेंसर और AI-आधारित एनालिटिक्स 14 करोड़ कृषि जोतों के लिए उत्पादन बढ़ाने, पानी और उर्वरकों के बेहतर उपयोग तथा जलवायु जोखिमों से निपटने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। जाधव ने लक्षित सब्सिडी, मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी और आरएंडडी पर कर प्रोत्साहन देने की मांग की, ताकि AGMARK-NET और e-NAM जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स के साथ तकनीकी एकीकरण तेज हो सके और भारत इनपुट-आधारित सब्सिडी मॉडल से टेक्नोलॉजी-आधारित कृषि व्यवस्था की ओर बढ़ सके।

संरचनात्मक सुधारों पर भी जोर
BDO इंडिया के एग्रीकल्चर पार्टनर सौम्यक बिस्वास ने छोटे और बिखरे भूमि जोत, संबद्ध क्षेत्रों में सीमित निवेश, अधिक पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान और अपर्याप्त शोध फंडिंग जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने जलवायु-स्मार्ट कृषि के लिए बजट में बढ़ोतरी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों को सशक्त करने, एफपीओ को बाजार से जोड़ने वाली रणनीतियों और क्रेडिट गारंटी के जरिए मजबूत बनाने, और बागवानी, दालों और तिलहनों में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की।

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