टोंक/जयपुर: किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में टोंक जिले के किसानों ने फैसला किया है कि 1 मार्च से 15 मार्च तक वे सरसों को मंडियों में नहीं ले जाएंगे और 6000 रुपये प्रति क्विंटल से कम दाम पर सरसों नहीं बेचेंगे। राजस्थान, जो भारत में सरसों उत्पादन में अग्रणी राज्य है, कुल 9.91% उत्पादन (551157 मैट्रिक टन) करता है।
एमएसपी और व्यापारियों की मनमानी
सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5950 रुपये/क्विंटल तय किया गया है, जिसमें 36% तेल अंश निर्धारित है। तेल अंश में 0.25% की वृद्धि पर किसान को केवल 15 रुपये अधिक मिलते हैं, जबकि व्यापारी 42% तेल अंश के आधार पर बोली लगाते हैं और मनमाफिक कटौती करते हैं। 1% तेल अंश घटने पर व्यापारी 150 रुपये तक काट लेते हैं।
इसके अलावा, मंडियों में व्यापारियों द्वारा 400-600 ग्राम प्रति क्विंटल अतिरिक्त वजन काटकर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है। यह पैसा न केवल व्यापारियों की जेब में जाता है बल्कि मंडी अधिकारियों को खुश करने के लिए भी खर्च होता है।
सरसों की सरकारी खरीद की मांग
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत केवल 25% सरसों की एमएसपी पर खरीद होती है, जिसे बढ़ाकर राजस्थान सरकार को 40 क्विंटल प्रति किसान करनी चाहिए। डबल इंजन सरकार होने के कारण यह जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की बनती है।
आयातित पाम ऑयल पर शुल्क बढ़ाने की मांग
रामपाल जाट ने कहा कि आयातित पाम ऑयल पर 85% तक आयात शुल्क लगाया जाए, जिससे देशी तेलों के दाम बढ़ें। 2021 में कोविड काल के दौरान सरसों में पाम ऑयल की मिलावट पर पाबंदी लगी थी, लेकिन अब फिर मिलावट हो रही है। खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने वाली सरकारी एजेंसियां निष्क्रिय हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।
बैठक में उपस्थित किसान नेता
इस बैठक में राष्ट्रीय महासचिव अकबर खान, युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी, जिला संयोजक बाबू लाल धाकड़, जिला अध्यक्ष गोपीलाल जाट, समाजसेवी सत्यनारायण जाट, उपाध्यक्ष सीताराम खादवाल, महामंत्री हरिशंकर धाकड़, प्रचार मंत्री राधेश्याम गोहरपुरा, तहसील अध्यक्ष दशरथ सिंह, महासचिव गोविंद जाट, रामकरण पासरोटिया, गणेश जाट सहित अन्य किसान नेता उपस्थित थे।