नई दिल्ली: नवीन जिन्दल समूह देश के विभिन्न हिस्सों में उच्च क्षमता वाली परमाणु परियोजनाओं की स्थापना के लिए गुजरात और ओडिशा सहित कम से कम नौ राज्यों में उपयुक्त स्थानों की तलाश कर रहा है।
अपनी ऊर्जा विविधीकरण रणनीति के तहत समूह लाखों करोड़ रुपये के निवेश से 18 गीगावाट क्षमता के परमाणु संयंत्र स्थापित करने की योजना पर काम कर है। इसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक देश की परमाणु क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने के सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देना है।
स्टील, खनन, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा और रियल एस्टेट क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बाद नवीन जिन्दल समूह अब परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कदम रख रहा है। इसके लिए ‘जिन्दल रिन्यूएबल्स’ की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘जिन्दल न्यूक्लियर पावर प्राइवेट लिमिटेड’ का गठन किया गया है।
इस घटनाक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “इस संबंध में बातचीत चल रही है और हम कई राज्य सरकारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।” उन्होंने बताया कि समूह देश के 9 से अधिक राज्यों में संभावित स्थलों का मूल्यांकन कर रहा है।
परियोजनाओं के सटीक स्थानों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इनमें अधिकांश तटीय राज्य जैसे कि गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं, जबकि इनके साथ झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मुख्य रूप से तटीय राज्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि परमाणु संयंत्रों के संचालन के लिए पानी एक बेहद जरूरी और प्राथमिक आवश्यकता है। इसके अलावा, उन अन्य राज्यों पर भी विचार किया जा रहा है जहां जल निकायों के माध्यम से पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
परियोजना के लिए प्रस्तावित स्थलों का मूल्यांकन कई कड़े मानकों पर किया जा रहा है। इनमें भूमि की उपलब्धता, जल संसाधन, भूगर्भीय और भूकंपीय अनुकूलता, बिजली ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी, विनियामक तत्परता और परियोजना की दीर्घकालिक व्यवहार्यता शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाओं की क्षमता के बारे में जानकारी देते हुए अधिकारी ने कहा कि इन परमाणु संयंत्रों में 700 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता के लार्ज मॉड्यूल रिएक्टर्स स्थापित करने की योजना है।
उद्योग जगत के अनुमानों का हवाला देते हुए अधिकारी ने बताया कि प्रति 1 गीगावाट क्षमता के परमाणु संयंत्र की स्थापना के लिए लगभग 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होती है। साथ ही, परमाणु संयंत्र की परिकल्पना से लेकर इसे शुरू करने में करीब तीन साल का समय लगता है।
कंपनी इन परमाणु परियोजनाओं के लिए आवश्यक उन्नत तकनीकों और संभावित साझेदारी के अवसरों को तलाशने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों के साथ भी लगातार बातचीत कर रही है।

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