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2000 रुपये के लेनदेन से शुरू हुआ विवाद, हत्या में फंसाने का आरोप: गाजियाबाद में मां ने उठाए पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी देहात क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक मां ने अपने 25 वर्षीय बेटे अरुण कुमार को पड़ोसी अमरपाल की हत्या के झूठे आरोप में फंसाए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित मां प्रेमवती पत्नी हरिश्चंद्र ने जिला अधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

29 दिसंबर की रात क्या हुआ?

घटना 29 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। प्रेमवती के अनुसार, उनके पड़ोसी अमरपाल ने अरुण को ₹2000 दिए क्योंकि वह काम करने गया था उसी के पुराने पैसे बाकी थे

रात करीब 8:30 बजे अरुण ने अमरपाल को 30 रुपये का डाटा रिचार्ज करने के लिए फोन किया। उस समय अमरपाल अपने भाई प्रदीप और दोस्त चंदन के साथ नया मोबाइल खरीदने जा रहा था।

करीब 9 बजे अमरपाल फोन खरीद कर तीनों वापस घर आ गए और घर के बाहर अलाव तापते रहे। आरोप है कि रात 9:30 बजे अमरपाल के पास किसी का फोन आया, जिसके बाद वह घर से निकल गया। रात 10 बजे तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिजन उसे खोजने लगे। कुछ देर बाद घर के पास खाली प्लॉट में अमरपाल का शव मिला।

परिवार का कहना है कि अमरपाल अक्सर उस खाली प्लॉट में अपने साथियों के साथ बैठकर सिगरेट पीता और सट्टा खेलता था। प्रेमवती का आरोप है कि सट्टे से जुड़े किसी बड़े विवाद को दबाने के लिए उनके बेटे को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

30 दिसंबर को पुलिस ने उठाया

प्रेमवती के मुताबिक, 30 दिसंबर को दोपहर करीब 2 बजे पुलिस अरुण को उठाकर ले गई। उस समय वह गुज्जर चौक स्थित बादाम के गोदाम में काम कर रहा था, जहां चार गाड़ियां माल लेकर आई थीं। शाम 7:30 बजे मां को जानकारी मिली तो वह थाने पहुंची। आरोप है कि पुलिस ने सुबह तक छोड़ने का आश्वासन दिया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दवा देने से रोका, टॉर्चर का आरोप

मां का कहना है कि अरुण का पहले एक्सीडेंट हो चुका है, जिससे उसके सिर और पैरों में चोट थी। उसे नियमित दवाइयों की जरूरत थी। आरोप है कि पुलिस ने पहले दवा देने से मना कर दिया। आधी रात 12:30 बजे काफी अनुरोध के बाद दवा खिलाने दी गई।

प्रेमवती ने आरोप लगाया कि 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक अरुण को थाने में अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया गया। उसे उल्टा लटकाकर लाठियों से पीटा गया और डर के कारण उससे जबरन कबूलनामा कराया गया।

साक्ष्य गढ़ने का आरोप

परिवार ने थाना अंकुर विहार के एसएचओ योगेंद्र पंवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि मृतक के मोबाइल फोन पर अरुण के फिंगरप्रिंट लिए गए और वीडियो बनाकर उसे दोषी साबित करने की कोशिश की गई।

गोदाम मालिक पर भी सवाल

प्रेमवती का आरोप है कि गोदाम मालिक ब्रिजेश पंडित, जो दिल्ली पुलिस में कार्यरत बताए जाते हैं, ने सीसीटीवी फुटेज देने के बजाय टालमटोल की। गिरफ्तारी के समय अरुण के पास मौजूद 25 हजार रुपये और उसकी शादी में मिली गाड़ी भी पुलिस ने कब्जे में ले ली।

परिवार का आरोप है कि अब उन्हें धमकियां दी जा रही हैं कि यदि आगे कार्रवाई की तो पति को भी चोरी के केस में फंसा दिया जाएगा।

मां बोली— “मेरा बेटा निर्दोष है”

प्रेमवती का कहना है कि उनका बेटा पहले से पारिवारिक और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। उसकी शादी को दो साल हुए थे, एक बच्चा भी था जिसकी मौत हो चुकी है। वह परिवार का सहारा था।

मां ने जिला अधिकारी से निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की जांच और पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो निर्दोष युवक की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।

फिलहाल पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस किसी भी प्रकार की कोई सुनवाई नहीं कर रही है ना ही कोई कार्यवाही कर रही है आप प्रेमवती अपने बेटे के इंसाफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है और उनका लगातार रो-रो कर बुरा हाल है वह उच्च अधिकारियों और प्रशासन से तुरंत मामले में संज्ञान लेकर न्याय दिलाने की मांग कर रही है ताकि समय रहते न्याय मिल सके और कोई बड़ी दुर्घटना होने से बचा जा सके

मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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