हरियाणा में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर छेड़छाड़ का आरोप लगा है। स्कूल की छात्रा की शिकायत पर प्रिंसिपल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।रोहतकः रोहतक के कलानौर में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल को बुधवार को NSS कैंप के दौरान 12वीं क्लास की छात्रा का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। FIR के अनुसार, 19 साल की छात्रा ने बताया कि वह 6 जनवरी को अपने स्कूल में NSS कैंप में गई थी और एक महिला टीचर के साथ बैठी थी, तभी प्रिंसिपल ने उसे अपने ऑफिस से एक नोटबुक लाने के लिए कहा।
छात्रा ने मंगलवार शाम को पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा कि प्रिंसिपल सर वहां आए और उन्होंने मुझसे अपने ऑफिस से एक नोटबुक लाने को कहा। मैं उनके ऑफिस गई और उन्होंने कॉरिडोर में मेरा पीछा किया, जहां उन्होंने मुझे गलत तरीके से छुआ। उन्होंने मुझे धमकी दी कि अगर यह घटना किसी को बताई तो वे मुझे स्कूल से निकाल देंगे। स्कूल से निकाले जाने के डर से मैं चुप रही और आज मैंने यह घटना अपने माता-पिता को बताई। शिकायत के बाद, पुलिस ने आरोपी देवेंद्र कटारिया को गिरफ्तार कर लिया।
जेल भेजा गया प्रिंसिपल
कलानौर पुलिस थाना के प्रभारी सतपाल सिंह ने बताया कि प्रिंसिपल को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने एक वीडियो बरामद किया है जिसमें प्रिंसिपल लड़की छात्रा को परेशान करते हुए दिख रहे हैं। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (महिलाओं के खिलाफ शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल) और 351(2) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बच्चों से फीडबैक लें अभिभावक
रोहतक बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सतीश शर्मा ने कहा कि ज्यादातर स्कूलों में एक आंतरिक शिकायत समिति होती है और जिला बाल कल्याण समिति नियमित रूप से स्कूलों का दौरा करके उनकी शिकायतों के बारे में जानती है। उन्होंने कहा कि राज्य में इतने सारे मामले सामने आ रहे हैं, यह चिंता का विषय है और हम इन घटनाओं को बहुत गंभीरता से लेते हैं। कई अपराधी पीड़ितों और माता-पिता को धमकी देते हैं और स्कूलों को बच्चों को ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए एक सुरक्षित जगह देने की जरूरत है। माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है और उन्हें रोजाना अपने बच्चों से फीडबैक लेना चाहिए।
बता दें कि पिछले साल जुलाई से इस तरह की पांचवीं घटना है, जिससे छात्रों की सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही पर चिंताएं बढ़ गई हैं।इस तरह के मामलों के बार-बार होने से स्कूलों में सुरक्षा उपायों पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर जब आरोपी वे लोग होते हैं जो छात्रों की भलाई और देखरेख के लिए जिम्मेदार होते हैं।




