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मनसे प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर, जानें क्या है वजह

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने और भाषा-आधारित घृणा फैलाने के आरोप में मनसे प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में ठाकरे और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। यह याचिका वकील घनश्याम उपाध्याय ने दायर की है।

महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने राज ठाकरे को लेकर बयान दिया
मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने कहा, “नया नगर में कोई मराठी नहीं बोलता और वहां के लोग संविधान में विश्वास नहीं करते, लेकिन वहां शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। कोविड महामारी के दौरान वहां किसी ने मास्क नहीं पहना और न ही टीका लगवाया। यह लव जिहाद का केंद्र है। देश को इस्लामिक राजधानी बनने से रोकने के लिए हिंदुओं को एकजुट रहने की जरूरत है। पीएम मोदी ने ‘एक हैं तो सुरक्षित हैं’ का नारा दिया। अगर कोई मुस्लिम बीएमसी में कमिश्नर बनता है, तो क्या हमारे लोग, मछुआरे सुरक्षित रहेंगे? हमारी सरकार हिंदुओं की रक्षा करेगी, अगर हिंदुओं पर हिंसा हुई तो हम चुप नहीं रहेंगे।”

महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा का क्या मामला है?
महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा का मामला हाल के वर्षों में, विशेष रूप से 2025 में, मराठी भाषा को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ संगठनों, खासकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं द्वारा हिंदी भाषी लोगों पर हमलों से जुड़ा है। यह विवाद मराठी भाषा की प्रमुखता और क्षेत्रीय अस्मिता को लेकर चल रहे तनाव का हिस्सा है, जिसमें हिंदी और अन्य गैर-मराठी भाषी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

2025 में मीरा रोड और ठाणे में हिंदी भाषी दुकानदारों और मजदूरों पर हमले की खबरें सामने आईं। उदाहरण के लिए, मीरा भायंदर में ‘जोधपुर स्वीट्स एंड नमकीन’ के मालिक बाबूलाल चौधरी पर MNS कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर मराठी न बोलने के कारण हमला किया।

अप्रैल 2025 में, दो युवतियों को अंग्रेजी में “एक्सक्यूज़ मी” कहने पर कुछ लोगों ने पीटा, जिसे मराठी भाषा विवाद से जोड़ा गया।

इन घटनाओं में हिंदी भाषी मजदूरों, व्यापारियों और आम लोगों को मराठी न बोलने के लिए निशाना बनाया गया, जिसमें मारपीट, गाली-गलौज और दुकानों पर हमले शामिल हैं।

बता दें कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को सांस्कृतिक पह चान का प्रतीक माना जाता है। कुछ स्थानीय संगठन, जैसे MNS और शिवसेना (UBT), हिंदी और अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव को मराठी के लिए खतरा मानते हैं।

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