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आरटीएच बिल: हंगामा क्यों है बरपा

– निजी और सरकारी अस्पताल  16 दिनों तक रहे वीरान

– हजारों रोगियों को नहीं मिल सका इलाज, सैंकड़ों मरीजों ने ली पड़ोसी राज्यों की शरण

– बिल में किए गए 8 संशोधन, राज्यपाल की स्वीकृति के बाद मिलेगा मरीजो को लाभ, डॉक्टर्स काम पर लौटेंगे

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पिछले 16 दिनों तक राजस्थान बवाल मचने के बाद आज यानी 4 अप्रैल को समझौ वार्ता के बाद डॉक्टर्स 5 अप्रैल से काम पर लौट रहे हैं। यह देश की पहली ऐसी राज्य सरकार है, जिसने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लाया राइट टू हेल्थ बिल 2022 बीती 21 मार्च को पारित किया था। विधेयक के प्रावधानों से असंतुष्ट लगभग 2,500 निजी अस्पतालों के डॉक्टर सड़कों उतरे, इस वजह से राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से लड़खड़ा गई कई मरीजों को इलाज नहीं मिल पाया वही कई को राज्य के बाहर जाना पड़ा, यह बात अलग है कि सामान्य रोगियों को तो डॉक्टर्स ने फोन पर दवाएं बता दी, लेकिन मल्टीपल रोगियों इलाज नहीं मिलने से उन्हें समीपवर्ती राज्यों में जाना पड़ा।

यह विधेयक उन मरीजों के लिए बहुत ही लाभकारी बताया जा रहा है, जो निजी अस्पतालों का भारी भरकम खर्च नहीं उठा सकते। इसे राजस्थान विधानसभा के पटल पर सितम्बर 2022 में ही रखा गया था, लेकिन विपक्ष और डॉक्टरों की मांग पर इसमें कुछ संशोधन किए गए। राजस्थान में सरकारी, प्राइवेट मिलाकर 55 हजार से ज्यादा डॉक्टर्स हैं। सैकड़ों सरकारी अस्पतालों के अलावा 2400 से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल हैं। इनमें जयपुर में ही कम से कम 500 से 600 अस्पताल हैं।  

दूसरी तरफ इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि इस बिल के तहत आपात स्थिति में निजी अस्पतालों को भी फ्री इलाज करना है, लेकिन, आपात स्थित क्या हो सकती है, इसे परिभाषित नहीं किया गया है। इस कारण वे किसी भी मरीज का फ्री में इलाज करने को बाध्य होंगे। ऐसी स्थिति में उनका खर्च कैसे निकलेगा। डॉक्टरों का कहना है कि इस बिल में गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज को रेफर करने की स्थिति में एम्बुलेंस की व्यवस्था करना अनिवार्य है। अब इस एम्बुलेंस का खर्च कौन वहन करेगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।

इस बिल में राज्य और जिला स्तर पर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज और मरीजों के अधिकारों के लिए प्राधिकरण का गठन किया जाना है। डॉक्टरों की मांग है कि इस प्राधिकरण में विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जाए ताकि वे पूरी प्रक्रिया को समझ सकें, अगर ऐसा नहीं होगा, तो चिकित्सकों को ब्लैकमेल किया जाएगा।

इसके अलावा डॉक्टरों ने अन्य कई मामलों में भी सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी उनका कहना है कि इस बिल में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिनमें कोई भी चिकित्सक स्वतंत्र होकर मरीज का इलाज नहीं कर सकता।

05 अप्रैल से अस्पतालों के ओटी होंगे फिर से रौशन

इसी जद्दोजहद के बाद प्रदेश  में पिछले 16 दिन से चल रही डॉक्टर्स की हड़ताल मंगलवार को खत्म हो गई। जयपुर में राइट टू हेल्थ (आरटीएच) बिल पर मंगलवार को डॉक्टर्स और सरकार के बीच 8 मांगों पर समझौता हो गया है। मुख्य सचिव उषा शर्मा से मीटिंग के बाद इस पर फैसला लिया गया। उधर सेक्रेटरी प्राइवेट हॉस्पिटल्स एण्ड नर्सिंग होम्स सोसाइटी डॉ विजय कपूर के अनुसार  सुबह 10.30 बजे डॉक्टरों का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्य सचिव से वार्ता के लिए उनके निवास पर पहुंचा था। सरकार ने हमारी मांगें मान ली है। हम सरकार के ड्रॉफ्ट से संतुष्ट है। बुधवार सुबह 8 बजे से सभी प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा।

समझौते के पहले डॉक्टर्स ने मंगलवार को महारैली निकाली। पिछले 10 दिन में डॉक्टर्स का ये दूसरा शक्ति प्रदर्शन था। इस रैली के बाद डॉक्टर्स का डेलिगेशन मुख्य सचिव से मिला और अपना आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया। यह रैली रेजिडेंट्स हॉस्टल ग्राउण्ड एसएमएस मेडिकल कॉलेज से शुरू होकर गोखले हॉस्टल रोड होते हुए टोंक रोड, महारानी कॉलेज तिराहा, अशोक मार्ग, राजपूत सभा भवन, पांच बत्ती, एमआई रोड, अजमेरी गेट, न्यू गेट, अल्बर्ट हॉल होते हुए एसएमएस मेडिकल कॉलेज पहुंची। इससे पहले 27 मार्च को भी बड़ी रैली जयपुर में निकाली गई थी।

बॉक्स 1

इस विधेयक के क्या है फायदे:

विधेयक के तहत इमरजेंसी में निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए मरीज को एडवांस पेमेंट से छूट है। अगर मरीज भुगतान नहीं कर पाता है तो खर्च राज्य सरकार उठाएगी। दूसरे अस्पताल में रेफर होने पर भी सरकार सारा खर्च देगी। सरकारी और गैर-सरकारी अस्पताल और डॉक्टर इमरजेंसी वाले मरीजों का मुफ्त इलाज करने से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे। मेडिको लीगल केस (एमएलसी) में भी उन्हें बिना पुलिस मंजूरी के तुरंत इलाज करना होगा। इमरजेंसी केस के अलावा मरीज अपनी सुविधा और इच्छानुसार लैब और दवा की दुकान चुन सकता है यानी दवा दुकानों, लैब और निजी अस्पतालों के बीच कमिशन का जाल टूटेगा।

फिलहाल यह बिल अभी केवल विधानसभा से पारित हुआ है। विधानसभा से पारित होने के बाद यह बिल अब राज्यपाल के पास है। बिल राज्यपाल से मंजूरी के बाद एक्ट बन जाएगा और उसके बाद इसके सभी नियम डिफाइन किए जाएंगे। उसके बाद यह प्रदेश में लागू हो जाएगा।

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