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क्राइम पर अंकुश आई जी गौरव सिंह राजपूत ने थानों मेंं कसावट की बारी

आईजी गौरव सिंह राजपूत ने रात्रि गश्त बढ़ाने पर दिया जोर

रीवा। जिले में बढ़ रहे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में नए आईजी से लोगों को बड़ी उम्मीदें लगा रखी हैं। लोगों की मंशा को ध्यान में रखते हुए विशेषकर रात्रि के समय पुलिस को अधिक सक्रिय रहने हेतु। एवं आम जनता के लिए रात्रि के समय कार्य भी अचानक होते हैं। जिसमे हॉस्पिटल जाना या फिर रेलवे स्टेशन जाना,पड़ सकता,हैं। इतना ही नहीं बल्कि सड़क खाली होने की खोज में लोग फोर व्हिलर से रात्रि के समय घर आते हैं। कई लोग नाइट ड्यूटी से भी आते हैं। ऐसे समय पर सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है जिसके कारण लोगों को असमाजिक तत्वों से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार लोग थाने मेें रिपोर्ट नहीं दर्ज करवाते कि कौन अपना समय व्यय करे। लोग बदमाशों से इसलिए नहीं उलझना चाहते क्योंकि उनके पास बदमाशों की तरह पर्याप्त समय नहीं है। यद्यपि क्राइम को देखते हुए रात्रि के समय पुलिस को गश्ती पर विशेष ध्यान रखना होगा। अब थानों में कसावट लाने की बारी है।

सीसीटीवी कैमरे व नेटवर्क को मजबूत
थानों के लिए यह आवश्यक है कि हर थानों में सीसीटीवी कैमरे हों और बाजार में संदिग्ध स्थानों पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। इससे क्राइम के बारे में तत्काल सूचना प्राप्त हो और क्राइम के समय त्वरित पुलिस सहायता आम,जन तक पहुंचाना,जगह क्राइम के पूर्व ही,आम जनता तक कार्यवाही हेतु पुलिस पहुंच जाएगी। साइबर और मुखबिर तंत्र भी मजबूत होना चाहिए जिससे थानों में कसावट आए और अपराधों पर अंकुश लग सके। अब जबकि समय सेटेलाइट और ए आई टेक्रालॉजियों का आ गया है तो थानों को इसलिए भी तकनीकी उपयोग में सबसे पहले आगे आना होगा जिससे पारदर्शिता बनी रहे और हर व्यक्ति को न्याय सुलभ हो।

आईजी ने दिए कई निर्देश
आईजी गौरव सिंह राजपूत काफी सुलझे हुए और ऊर्जावान अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने क्राइम रोकने की दिशा में कई रणनीतियों के मंत्र दिए। उन्होंने हाल ही में अचानक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के थानों का निरीक्षण किया। यहां तक कि कई थाने वे देर रात में पहुंचे। उन्होंने थाने के बारे में पूरी जानकारी ली। उनका मुख्य फोकस इस बात पर रहा है कि महिला तथा बच्चों पर हो रहे अपराधों पर कड़ाई के साथ,नशा मुक्ति, समाज एवं साठ गाठ कर बैठ पुलिस अधिकारी एवं पुलिस कर्मियों पर अंकुश लगाया जाए।

क्या लगेगा कुप्रथा पर विराम ?
चूंकि जिले में यह चर्चा रहती है कि प्राय: थाना प्रभारी एवं पुलिस अधीक्षक एवं नगर पुलिस अधीक्षक नेताओं के चरणवंदन करने में लगे रहते हैं और उस छोली को भरने के लिए अपराध को संरक्षित करते रहते है। जैसे कि रीवा सम्भाग में अवैध वसूली कोरेक्स, शराब, गांजा तस्करों,का संरक्षण कर धन अर्जन करना मुख्य उद्देश्य बन जाता है। नए आईजी के आने से इस प्रथा में काफी हद तक विराम लगता नजर आने लगा है। इन कुप्रथाओं पर विराम लगाने के लिए आई जी थानों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। देखना होगा कि इस पर जिला पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक एवं थाना प्रभारी एवं पुलिस कर्मियों पर क्या और कितना असर एवं अमल दिखाई देता है यह समय ही आम जनता को बाताएगा पुलिस कितना अमल करती अपने सप्रिमो,का आदेश है?

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